BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
21 views

पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा किस संशोधन से मिला?

Detailed Explanation

73वें संशोधन से पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
Share:

Related Questions

भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक दायित्वों और शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार भारत के महान्यायवादी को अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई (Audience) का अधिकार प्राप्त है, तथा वह केंद्र सरकार का एक पूर्णकालिक वेतनभोगी विधिक सलाहकार होता है जिसे निजी कानूनी प्रैक्टिस (Private Practice) करने से पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। 2. नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) भारत की संचित निधि के साथ-साथ प्रत्येक राज्य और उस संघ राज्यक्षेत्र की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करता है जहाँ विधानसभा है, और CAG द्वारा तैयार की गई लेखापरीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति (संघ के मामलों में) और संबंधित राज्यों के राज्यपालों (राज्य के मामलों में) के माध्यम से क्रमशः संसद और राज्य विधानमंडलों के पटल पर रखवाई जाती है। 3. CAG को उसके पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु अपने पद से सेवानिवृत्ति के पश्चात सीएजी भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या लाभ के पद को धारण करने के लिए पूर्णतः अपात्र (Ineligible) होता है। 4. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों या उसकी किसी भी समिति में बोलने और भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, किंतु अनुच्छेद 88 के अनुसार उसे संसद की बैठकों में मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु इन सभी को उनके पद से हटाने का अधिकार केवल और केवल भारत के राष्ट्रपति को ही प्राप्त है, राज्यपाल को नहीं। 2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य या अध्यक्ष को उसके पद से 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) द्वारा राष्ट्रपति द्वारा निर्देशित जाँच के बाद ऐसी हटाने की संस्तुति न कर दी जाए, और उच्चतम न्यायालय की यह जाँच रिपोर्ट राष्ट्रपति के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होती है। 3. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य नियोजन (Employment) के पात्र नहीं होते हैं, सिवाय इसके कि वे संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में आगे नियुक्ति प्राप्त कर सकें। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा तथा राजनीतिक दलों के विनियमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संवैधानिक संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संशोधनों) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और अंग्रेजी भाषा इन 22 भाषाओं में शामिल नहीं है। 2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) राजनीतिक दलों का पंजीकरण करता है, किंतु एक बार पंजीकृत होने के बाद निर्वाचन आयोग को किसी भी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने या वापस लेने की वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है। 3. संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून), जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया है कि यदि सदन का कोई सदस्य अपने राजनीतिक दल के व्हिप (Whip) के विरुद्ध सदन में मतदान करता है या मतदान से अनुपस्थित रहता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जाएगी, और इस संबंध में पीठासीन अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय अंतिम होता है जिसकी न्यायिक समीक्षा किसी भी न्यायालय द्वारा नहीं की जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की स्वतंत्रता, संरचना और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संसद द्वारा बनाए गए विधि के अधीन राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया तथा आधार वही होते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के होते हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की लिखित अनुशंसा के बिना किसी भी परिस्थिति में पद से नहीं हटाया जा सकता है। 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों का पंजीकरण किया जाता है, किंतु वर्ष 1998 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के उपरांत निर्वाचन आयोग को यह वैधानिक अधिकार प्राप्त हो गया है कि वह किसी पंजीकृत राजनीतिक दल द्वारा आंतरिक लोकतंत्र के हनन या संविधान के प्रति निष्ठा के अभाव पर उसका पंजीकरण रद्द (De-register) कर सकता है। 3. भारत में electoral funding (चुناवी वित्तपोषण) में पारदर्शिता लाने और चुनावी सुधारों के क्रम में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'एस.डी. एसोसिएशन बनाम भारत संघ (2024)' के ऐतिहासिक निर्णय में 'चुनावी बॉन्ड योजना' (Electoral Bonds Scheme) को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया, क्योंकि यह नागरिकों के सूचना के अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(a)) का उल्लंघन करती थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के सदनों (विधानसभा और विधान परिषद) की संरचना, गठन तथा उनकी विधायी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद का सृजन या उसका उत्सादन (Abolition) कर सकती है, यदि संबंधित राज्य की विधानसभा कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे, और इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 171 के अंतर्गत किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, किंतु किसी भी स्थिति में विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए, हालांकि अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम से पहले वहाँ इसके कम सदस्य भी रहे थे। 3. विधान परिषद के कुल सदस्यों में से एक-तिहाई सदस्यों का निर्वाचन स्थानीय निकायों (जैसे- नगरपालिका, जिला बोर्ड) के निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, एक-तिहाई सदस्यों का निर्वाचन विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने से भिन्न व्यक्तियों में से किया जाता है, और एक-बारहवें सदस्यों का निर्वाचन ऐसे स्नातकों (Graduates) द्वारा किया जाता है जो कम से कम तीन वर्ष पूर्व उस राज्य के क्षेत्र के भीतर किसी विश्वविद्यालय से स्नातक हो चुके हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.