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विलोपन (Extinction) क्या है?

विलोपन वह प्रक्रिया है जिसमें अनुबंधित उद्दीपक बार-बार अनअनुबंधित उद्दीपक के बिना आने पर अनुबंधित अनुक्रिया कमज़ोर होते-होते लुप्त हो जाती है। यह पावलोव के शास्त्रीय अनुबंधन से जुड़ी संकल्पना है।

विलोपन: विस्तृत व्याख्या

विलोपन को समझें

पावलोव के कुत्ते घंटी सुनकर लार टपकाना सीख गए थे। जब कई बार घंटी बजाई गई पर भोजन नहीं दिया गया, तो धीरे-धीरे लार निकलना बंद हो गया। क्रियाप्रसूत अनुबंधन में भी, पुनर्बलन बंद कर देने पर सीखा हुआ व्यवहार कम होता जाता है, जिसे विलोपन कहते हैं।

याद रखने योग्य बिंदु

  • अनुबंधित उद्दीपक अकेले, बिना अनअनुबंधित उद्दीपक के
  • पूर्ण मिटाव नहीं, स्वतः पुनर्प्राप्ति संभव है
  • शिक्षा में भय या बुरी आदतें छुड़ाने में उपयोगी

उदाहरण

जिस बच्चे को स्कूल की घंटी से डर लगने लगा था, उसके साथ बार-बार बिना किसी बुरे अनुभव के घंटी का अनुभव होने पर डर धीरे-धीरे ख़त्म हो जाता है।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

अनुबंधित अनुक्रिया कमज़ोर होकर रुक जाए तो विलोपन। उसके बाद अचानक फिर दिखे तो स्वतः पुनर्प्राप्ति। दोनों साथ-साथ पूछे जाते हैं।

विलोपन पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

पावलोव के सभी प्रश्न देखें →

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संबंधित अवधारणाएँ

संदर्भ
  • इवान पावलोव, Conditioned Reflexes (1927 का अंग्रेज़ी अनुवाद)
  • NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें