BaalVikas
Menu

इड, अहं और पराहं (Id, Ego and Superego) क्या है?

फ्रायड के अनुसार व्यक्तित्व के तीन भाग हैं: इड (मूल प्रवृत्तियाँ, सुख के सिद्धांत पर चलता है), अहं (यथार्थ के सिद्धांत पर चलता है) और पराहं (नैतिकता और आदर्श)। अहं बाकी दोनों के बीच संतुलन बनाता है।

इड, अहं और पराहं: विस्तृत व्याख्या

इड, अहं और पराहं को समझें

इड जन्म से ही होता है और तुरंत इच्छापूर्ति चाहता है। अहं बाद में विकसित होता है और सोच-समझकर ऐसा रास्ता खोजता है जो वास्तविकता में संभव हो। पराहं माता-पिता और समाज के मूल्यों से बनता है और अंतरात्मा की भूमिका निभाता है। तीनों का टकराव चिंता और मानसिक द्वंद्व को जन्म देता है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • इड: सुख का सिद्धांत
  • अहं: यथार्थ का सिद्धांत
  • पराहं: नैतिकता का सिद्धांत

उदाहरण

परीक्षा के दिन खेलने का मन करना इड का स्वर है, खेलने की जगह पढ़ाई का फ़ैसला अहं का, और नक़ल न करने का अपराध-बोध पराहं का।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

तीनों के कार्य-सिद्धांत जोड़ी में पूछे जाते हैं: इड = सुख, अहं = यथार्थ, पराहं = नैतिकता। फ्रायड के साथ ही इनका उल्लेख याद रखें।

इड, अहं और पराहं पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

फ्रायड के सभी प्रश्न देखें →

तुलना पढ़ें

संबंधित अवधारणाएँ

संदर्भ
  • सिगमंड फ्रायड, The Ego and the Id (1923)
  • NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें