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मनोलैंगिक विकास की अवस्थाएँ (Psychosexual Stages) क्या है?

मनोलैंगिक विकास फ्रायड का सिद्धांत है जिसमें बाल्यावस्था से किशोरावस्था तक पाँच अवस्थाएँ बताई गई हैं: मौखिक, गुदीय, लैंगिक अंग (फैलिक), सुषुप्ति और जननेंद्रिय। हर अवस्था में आनंद का केंद्र शरीर का एक अलग हिस्सा है।

मनोलैंगिक विकास की अवस्थाएँ: विस्तृत व्याख्या

मनोलैंगिक विकास की अवस्थाएँ को समझें

मौखिक अवस्था जन्म से लगभग एक वर्ष तक, गुदीय एक से तीन वर्ष, फैलिक तीन से छह वर्ष, सुषुप्ति छह वर्ष से किशोरावस्था तक और जननेंद्रिय अवस्था किशोरावस्था से आगे मानी गई है। फ्रायड के अनुसार किसी अवस्था में आवश्यकता पूरी न होने या अति पूर्ति से व्यक्ति उसी अवस्था में अटक (स्थिरण) सकता है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • क्रम: मौखिक, गुदीय, फैलिक, सुषुप्ति, जननेंद्रिय
  • अटकना या स्थिरण की संकल्पना इसी सिद्धांत की है
  • सुषुप्ति अवस्था में यौन ऊर्जा सुप्त रहती है

उदाहरण

माना जाता है कि जिस शिशु की मौखिक अवस्था की आवश्यकताएँ ठीक से पूरी नहीं हुईं, वह बड़ा होकर नाखून चबाने या अधिक खाने जैसी आदतों में उलझ सकता है। यह स्थिरण का उदाहरण है।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

पाँचों अवस्थाओं का क्रम और आयु-सीमा पूछी जाती है। इस सिद्धांत का संबंध फ्रायड से है, जबकि एरिक्सन का मनोसामाजिक सिद्धांत उसका सामाजिक विस्तार है।

मनोलैंगिक विकास की अवस्थाएँ पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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संदर्भ
  • सिगमंड फ्रायड, Three Essays on the Theory of Sexuality (1905)
  • NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें