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प्रभाव का नियम (Law of Effect) क्या है?

प्रभाव का नियम थॉर्नडाइक का नियम है कि जिस प्रतिक्रिया के बाद संतोषजनक परिणाम मिलता है, उसका उद्दीपक से संबंध मज़बूत होता है और वह दोहराई जाती है। असंतोषजनक परिणाम से संबंध कमज़ोर पड़ता है।

प्रभाव का नियम: विस्तृत व्याख्या

प्रभाव का नियम को समझें

थॉर्नडाइक ने बिल्ली को पहेली-पिंजरे में बंद करके देखा कि वह धीरे-धीरे उस क्रिया को अपनाती है जो उसे बाहर निकलने और भोजन पाने का सुख देती है। बाद में उन्होंने पाया कि सुखद परिणाम का असर बहुत मज़बूत होता है, जबकि दंड का असर कमज़ोर और अनिश्चित। यही नियम आगे चलकर स्किनर के पुनर्बलन की भूमिका तैयार करता है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • सुखद परिणाम से उद्दीपक-अनुक्रिया संबंध दृढ़
  • प्रयास और त्रुटि अधिगम से जुड़ा
  • स्किनर के पुनर्बलन की पूर्वपीठिका

उदाहरण

जिस विद्यार्थी को हल सही करने पर कक्षा में सराहना मिलती है, वह अगली बार भी वैसे ही ध्यान से हल करने लगता है। यहाँ सुखद परिणाम ने व्यवहार को मज़बूत किया।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

थॉर्नडाइक के तीन मुख्य नियम हैं: प्रभाव, तत्परता और अभ्यास। इनमें प्रभाव का नियम सबसे महत्त्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इसे सबसे अधिक पूछा जाता है।

प्रभाव का नियम पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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संदर्भ
  • एडवर्ड थॉर्नडाइक, Animal Intelligence (1911)
  • NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें