तत्परता का नियम (Law of Readiness) क्या है?
तत्परता का नियम थॉर्नडाइक का नियम है कि सीखना तभी सुखद और प्रभावी होता है जब सीखने वाला शारीरिक और मानसिक रूप से उसके लिए तैयार हो। तैयार न होने पर थोपी गई शिक्षा से खीझ पैदा होती है।
तत्परता का नियम: विस्तृत व्याख्या
तत्परता का नियम को समझें
इसका शिक्षण में सीधा उपयोग है: पाठ शुरू करने से पहले विद्यार्थियों की रुचि और पूर्व-ज्ञान की जाँच करना। इसीलिए प्रस्तावना या अभिप्रेरण को पाठ का पहला चरण माना जाता है। तैयार बच्चे को सीखने दिया जाए तो संतोष मिलता है, उसे रोका जाए तो झुँझलाहट होती है।
याद रखने योग्य बिंदु
- शारीरिक और मानसिक तैयारी ज़रूरी
- पाठ की प्रस्तावना इसी नियम पर टिकी है
- तैयार न बच्चे पर पढ़ाई थोपने से अरुचि बढ़ती है
उदाहरण
शिक्षक भिन्न पढ़ाने से पहले पिज़्ज़ा के टुकड़ों पर बातचीत करके बच्चों की उत्सुकता जगाते हैं। इस तैयारी के बाद बच्चे नई अवधारणा को आसानी से अपनाते हैं।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
तैयारी, पाठ की प्रस्तावना, रुचि जगाना जैसे संकेत तत्परता के नियम की ओर जाते हैं। इसे प्रभाव और अभ्यास के नियमों से अलग रखें।
तत्परता का नियम पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)
- अधिगम (Learning) के अध्ययन में थार्नडाइक के 'प्रभाव के नियम' (Law of Effect), पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन'…
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- अधिगम के 'प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error) में 'प्रभाव का नियम' (Law of Effect) किसने दिया था?
- अधिगम के किस सिद्धांत को 'उद्दीपन-प्रतिक्रिया सिद्धांत' (S-R Theory) कहा जाता है?
- थार्नडाइक के सीखने के सिद्धांत (Connectionism Theory) और शिक्षा में इसके अनुप्रयोग के संदर्भ में निम्नलिखित…
- अधिगम (Learning) के विभिन्न सिद्धांतों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, एडवर्ड थार्नडाइक के 'तत्परता का…
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संबंधित अवधारणाएँ
संदर्भ
- एडवर्ड थॉर्नडाइक, The Original Nature of Man (1913)
- NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें