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थॉर्नडाइक बनाम स्किनर: अंतर और तुलना

थॉर्नडाइक ने प्रयास और त्रुटि से बने उद्दीपक-अनुक्रिया संबंधों को सीखने का आधार माना, जबकि स्किनर ने व्यवहार के परिणाम, यानी पुनर्बलन, पर ध्यान देकर क्रियाप्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत दिया। स्किनर का काम थॉर्नडाइक के प्रभाव के नियम से आगे बढ़ता है।

थॉर्नडाइक का सिद्धांत और स्किनर का सिद्धांत में मुख्य अंतर

थॉर्नडाइक का सिद्धांत बनाम स्किनर का सिद्धांत — तुलना तालिका
आधारथॉर्नडाइक का सिद्धांतस्किनर का सिद्धांत
सिद्धांत का नामप्रयास और त्रुटि का सिद्धांत (संबंधवाद)।क्रियाप्रसूत अनुबंधन।
प्रयोगबिल्ली को पहेली-पिंजरे में बंद करके।चूहे या कबूतर को स्किनर बॉक्स में रखकर।
मुख्य संकल्पनाउद्दीपक और अनुक्रिया के बीच संबंध बनना।अनुक्रिया के बाद मिलने वाला पुनर्बलन।
मुख्य नियमप्रभाव, तत्परता और अभ्यास के नियम।पुनर्बलन, दंड, विलोपन और पुनर्बलन की अनुसूचियाँ।
परिणाम की भूमिकासंतोषजनक परिणाम संबंध को दृढ़ करता है (प्रभाव का नियम)।पुनर्बलन व्यवहार की पुनरावृत्ति की संभावना बढ़ाता है।
कृति और वर्षAnimal Intelligence (1911)।The Behavior of Organisms (1938)।
शिक्षा में उपयोगअभ्यास, तत्परता और प्रेरणादायक परिणाम।अभिक्रमित अधिगम, शेपिंग और पुनर्बलन की योजना।

एक ही परंपरा के दो चरण

दोनों व्यवहारवादी परंपरा के हैं और दोनों परिणाम को सीखने का केंद्र मानते हैं। थॉर्नडाइक ने बिंदु रखा कि परिणाम संबंध को मज़बूत करता है। स्किनर ने उसे और सटीक रूप में परिभाषित करके पुनर्बलन की अनुसूचियाँ तक विकसित कीं।

परीक्षा के लिए याद रखें

प्रयास-त्रुटि, पहेली-पिंजरा और प्रभाव का नियम थॉर्नडाइक। स्किनर बॉक्स, पुनर्बलन और शेपिंग स्किनर। दोनों के जोड़े वाले प्रश्नों में यही पहचान सहायक है।

अभ्यास प्रश्न

संदर्भ
  • एडवर्ड थॉर्नडाइक, Animal Intelligence (1911)
  • बी.एफ. स्किनर, The Behavior of Organisms (1938)