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नो-डिटेंशन नीति (No-Detention Policy) क्या है?

नो-डिटेंशन नीति के अनुसार शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 16 में प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक किसी बच्चे को किसी कक्षा में रोका या विद्यालय से निकाला नहीं जा सकता था। 2019 के संशोधन से राज्यों को कक्षा 5 और 8 में इसे बदलने की छूट मिली।

नो-डिटेंशन नीति: विस्तृत व्याख्या

नो-डिटेंशन नीति को समझें

इसका उद्देश्य बच्चों को असफलता के डर और बीच में पढ़ाई छोड़ने से बचाना था, और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन के साथ सीखने की प्रक्रिया पर ज़ोर देना था। आलोचना यह रही कि इससे सीखने के स्तर पर ध्यान कम हुआ। संशोधन के बाद कक्षा 5 और 8 में नियमित परीक्षा हो सकती है और असफल होने पर पुनः परीक्षा के बाद भी रोका जा सकता है, यह राज्य सरकार तय करती है।

याद रखने योग्य बिंदु

  • मूल प्रावधान: धारा 16, प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक नहीं रोकना
  • RTE संशोधन अधिनियम 2019 से राज्यों को छूट
  • कक्षा 5 और 8 में नियमित परीक्षा संभव

उदाहरण

पहले कोई बच्चा कक्षा 5 में परीक्षा में असफल भी होता तो भी अगली कक्षा में चला जाता था। 2019 के संशोधन के बाद जिन राज्यों ने नियम बदले हैं, वहाँ दोबारा परीक्षा के बाद भी असफल रहने पर उसे उसी कक्षा में रोका जा सकता है।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

धारा 16 और 2019 का संशोधन जोड़ी में याद रखें। किस कक्षा पर छूट लागू है (5 और 8) और निर्णय का अधिकार (राज्य सरकार) अक्सर पूछा जाता है।

नो-डिटेंशन नीति पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

RTE अधिनियम 2009 के सभी प्रश्न देखें →

संबंधित अवधारणाएँ

संदर्भ
  • भारत सरकार, निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, धारा 16
  • निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (संशोधन) अधिनियम 2019