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UPTET
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प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली तथा बौद्ध और वैदिक कालीन शिक्षण संस्थाओं के तुलनात्मक अध्ययन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बौद्ध कालीन शिक्षा प्रणाली में उच्च शिक्षा का केंद्र 'विहार' और 'संघ' होते थे, जहाँ शिक्षा प्राप्त करने वाले भिक्षुओं को 'सामणेर' कहा जाता था, तथा नालंदा, वल्लभी और विक्रमशिला जैसे महाविहार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के प्रसिद्ध केंद्र थे जहाँ प्रवेश के लिए कठोर द्वार-पंडित (Gatekeeper Scholars) मौखिक परीक्षा लेते थे। 2. वैदिक कालीन शिक्षा प्रणाली में गुरुकुल आधारित शिक्षा में 'ब्रह्मचर्य आश्रम' का पालन करना अनिवार्य था, और यहाँ छात्रों के चरित्र निर्माण, आत्म-संयम तथा आध्यात्मिक चेतना के विकास पर बल दिया जाता था, जहाँ शिक्षा का माध्यम संस्कृत भाषा थी। 3. मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में प्राथमिक शिक्षा के लिए 'मक्तब' (Maktab) और उच्च शिक्षा के लिए 'मदरसा' (Madarsa) की व्यवस्था थी, तथा मक्तब में कुरान की आयतों को कंठस्थ कराने और लिखने की प्रारंभिक शिक्षा दी जाती थी, लेकिन इसमें किसी भी प्रकार की धर्मनिरपेक्ष या व्यावहारिक शिक्षा का पूर्ण अभाव था। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि बौद्ध कालीन शिक्षा में विहार और संघ उच्च शिक्षा के केंद्र थे, प्रारंभिक भिक्षु को 'सामणेर' कहा जाता था और नालंदा, विक्रमशिला जैसे महाविहारों में प्रवेश के लिए द्वार-पंडित मौखिक परीक्षा लेते थे। कथन 2 सही है क्योंकि वैदिक काल में शिक्षा गुरुकुलों में ब्रह्मचर्य आश्रम के तहत दी जाती थी, जिसमें चरित्र निर्माण और संस्कृत भाषा मुख्य थी। कथन 3 गलत है क्योंकि मक्तब और मदरसों में केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि 'अकली' विषयों (तर्कशास्त्र, दर्शन, गणित, चिकित्सा, व्याकरण आदि) की भी शिक्षा दी जाती थी, अतः 'पूर्ण अभाव' कहना गलत है।
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