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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights - Articles 12-35) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 13 यह सुनिश्चित करता है कि मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पनीकरण करने वाली विधियाँ उस असंगति की मात्रा तक शून्य होंगी, तथा इसके अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) और उच्च न्यायालयों (अनुच्छेद 226) को न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति प्राप्त होती है।
- 2. अनुच्छेद 16 के अंतर्गत राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी, तथा इसके तहत केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उद्भव, जन्मस्थान और निवास के आधार पर या इनमें से किसी के आधार पर राज्य द्वारा किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव किया जा सकता है।
- 3. अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह स्वतंत्रता के अधिकार केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही उपलब्ध हैं, किंतु इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा, लोक व्यवस्था (Public Order) या नैतिकता के हित में राज्य द्वारा उचित निर्बंधन (Reasonable Restrictions) लगाए जा सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 13 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) का आधार प्रदान करता है। इसके अनुसार, मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली सभी विधियाँ (पूर्व-संवैधानिक और पश्चात-संवैधानिक दोनों) उस असंगति की मात्रा तक शून्य (Void) होंगी। इस शक्ति का उपयोग सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32 के तहत) और उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226 के तहत) करते हैं।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 16(2) के अनुसार, राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति के संबंध में **केवल** धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उद्भव, जन्मस्थान और **निवास** (Residence) के आधार पर या इनमें से किसी के आधार पर किसी भी नागरिक के साथ कोई भेदभाव **नहीं** किया जाएगा (न कि 'किया जा सकता है')। हालांकि, अनुच्छेद 16(3) संसद को यह अधिकार देता है कि वह किसी राज्य में रोजगार के संबंध में निवास की शर्त निर्धारित कर सकती है।
कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह स्वतंत्रताएँ (वाक् स्वतंत्रता, शांतिपूर्वक सम्मेलन, संघ निर्माण, संचरण, निवास और व्यापार) केवल भारतीय नागरिकों को ही प्राप्त हैं, विदेशी नागरिकों को नहीं। साथ ही, इन अधिकारों पर राज्य सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, लोक व्यवस्था, decency या नैतिकता, न्यायालय अवमानना, मानहानि या अपराध उद्दीपन के आधार पर 'उचित निर्बंधन' (Reasonable Restrictions) लगाए जा सकते हैं। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 311' के अंतर्गत लोक सेवकों को प्राप्त सुरक्षा और संवैधानिक संरक्षण के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 311 संघ या राज्य के अधीन सिविल पद धारण करने वाले व्यक्तियों को बर्खास्त करने, हटाने या रैंक में अवनत करने (Reduction in rank) के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करता है, और यह सुरक्षा न केवल सिविल सेवकों बल्कि रक्षा सेवाओं (Defence Services) के सदस्यों पर भी समान रूप से लागू होती है।
2. अनुच्छेद 311 के तहत किसी भी लोक सेवक को तब तक बर्खास्त या पदच्युत नहीं किया जा सकता जब तक कि उसे उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की सूचना देकर सुनवाई का उचित अवसर (Reasonable opportunity of being heard) न दिया गया हो।
3. इस अनुच्छेद के अंतर्गत कुछ अपवादात्मक परिस्थितियाँ भी शामिल हैं, उदाहरण के लिए, यदि किसी लोक सेवक को आपराधिक आचरण के आधार पर दोषी ठहराया जाता है, या यदि संबंधित प्राधिकारी के लिए यह व्यावहारिक नहीं है कि वह ऐसा अवसर दे, या यदि राष्ट्रपति या राज्यपाल संतुष्ट हैं कि राज्य की सुरक्षा के हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो सुनवाई का अवसर देने की आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संस्कृत गद्य का प्रारंभिक और उत्कृष्ट उदाहरण किस अभिलेख को माना जाता है?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'धन विधेयक' (Money Bill - Article 110) तथा वित्तीय विध विधियों की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 110 के अनुसार, किसी विधेयक को धन विधेयक तभी माना जाएगा जब उसमें केवल कराधान, भारत की संचित निधि से धन का विनियोग, या उससे जुड़े अन्य विशिष्ट अनुषांगिक मामले शामिल हों, और यदि किसी धन विधेयक में अन्य गैर-वित्तीय मामले (जैसे कोई दंड या जुर्माना लगाने का प्रावधान) भी मिला दिए जाते हैं, तो वह स्वतः धन विधेयक नहीं रह जाता है।
2. राज्य सभा को लोकसभा द्वारा पारित किसी धन विधेयक को अपनी सिफारिशों के साथ या बिना सिफारिशों के अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर वापस करना अनिवार्य होता है, और यदि राज्य सभा इस अवधि के भीतर विधेयक को वापस नहीं करती है, तो वह दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे लोकसभा ने पारित किया था।
3. 'कीहोटो होलोहोहन बनाम जैचिलू' या वित्तीय विधायी मामलों से जुड़े अन्य न्यायिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया गया है कि लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) द्वारा किसी विधेयक को 'धन विधेयक' के रूप में प्रमाणित करने का निर्णय अंतिम होता है, और इस प्रमाणन को न्यायालय में इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि उसमें प्रक्रियात्मक अनियमितता बरती गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1931 के 'कराची अधिवेशन' (Karachi Session) और उससे संबंधित 'मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रमों के प्रस्ताव' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कराची अधिवेशन की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी, और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज्य' के लक्ष्य को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था।
2. इस अधिवेशन में पारित 'मौलिक अधिकारों और आर्थिक नीति' का ऐतिहासिक प्रस्ताव मुख्य रूप से जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ उद्योगों के राज्य के नियंत्रण या स्वामित्व का प्रावधान भी शामिल था।
3. इस प्रस्ताव में पहली बार कृषि ऋणों की राहत, श्रमिकों के लिए जीवन निर्वाह मजदूरी और काम के उचित घंटों जैसे सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को राष्ट्रीय आंदोलन के एजेंडे में शामिल किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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यजुर्वेद मुख्य रूप से किससे संबंधित है?
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