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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' (राज्य के नीति निर्देशक तत्व - अनुच्छेद 36 से 51) तथा 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code - अनुच्छेद 44) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार राज्य, भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा, और यह उपबंध नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत होने के कारण देश की न्यायपालिका द्वारा स्वतः प्रवर्तनीय (Self-enforceable) है।
- 2. 'शामला बनाम स्टेट ऑफ पंजाब' और 'सारला मुद्गल बनाम भारत संघ' जैसे ऐतिहासिक सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों में समय-समय पर यह रेखांकित किया गया है कि देश में एक समान नागरिक संहिता का होना राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने और लैंगिक न्याय (Gender Justice) को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- 3. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत शामिल अधिकांश प्रावधान भले ही वाद योग्य (Justiciable) नहीं हैं, किंतु संविधान के अनुच्छेद 37 में स्वयं यह स्पष्ट किया गया है कि इसमें अंतर्विष्ट सिद्धांत देश के शासन में मौलिक (Fundamental) हैं और विधि बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में दिए गए नीति निर्देशक तत्व (DPSP) प्रकृति से 'अवादयोग्य' (Non-justiciable) हैं, यानी इन्हें किसी भी न्यायालय द्वारा बलपूर्वक लागू नहीं कराया जा सकता है। अनुच्छेद 37 स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करता है कि ये किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं। अतः कथन 1 गलत है।
कथन 2 सही है: सर्वोच्च न्यायालय ने 'सारला मुद्गल बनाम भारत संघ' (1995) और अन्य कई मामलों में बार-बार सरकार को याद दिलाया है कि अनुच्छेद 44 के तहत देश में 'समान नागरिक संहिता' (UCC) को लागू किया जाना चाहिए, जो राष्ट्रीय एकीकरण और विभिन्न पर्सनल लॉ में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को समाप्त करने (लैंगिकता न्याय) के लिए महत्वपूर्ण है।
कथन 3 सही है: संविधान के अनुच्छेद 37 में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यद्यपि DPSP अदालत द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी इसमें अंतर्विष्ट सिद्धांत 'देश के शासन में मौलिक' हैं और देश के लिए कानून बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का राजनैतिक एवं नैतिक कर्तव्य होगा।
Related Questions
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'महासागरीय धाराओं' (Ocean Currents) तथा उनके निर्माण और जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के लिए मुख्य रूप से प्रचलित हवाएँ (Prevailing Winds), पृथ्वी का घूर्णन (कोरिऑलिस बल), और जल के घनत्व में भिन्नता (तापमान और लवणता के कारण) उत्तरदायी होती हैं, जिसमें व्यापारिक हवाएँ और पछुआ हवाएँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं।
2. 'एल नीनो' (El Niño) घटना के दौरान, दक्षिणी प्रशांत महासागर में पेरू के तट के पास ठंडी धारा (पेरू या हम्बोल्ट धारा) का प्रभाव अत्यधिक प्रबल हो जाता है, जिससे उस क्षेत्र में जल का तापमान असामान्य रूप से गिर जाता है और भारतीय मानसून पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
3. उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय धाराएँ कोरिऑलिस बल के प्रभाव के कारण अपनी दाईं ओर (Clockwise) मुड़ जाती हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में वे अपनी बाईं ओर (Counter-clockwise) मुड़ जाती हैं, जो फेरेल के नियम के अनुरूप है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'सतत विकास लक्ष्य' (Sustainable Development Goals - SDGs) और बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index - MPI) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाए गए '2030 एजेंडा फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' के अंतर्गत कुल 17 सतत विकास लक्ष्य (SDGs) निर्धारित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य 2030 तक गरीबी और भुखमरी को पूरी तरह समाप्त करना तथा पर्यावरण की रक्षा करना है, और ये सभी लक्ष्य कानूनी रूप से सभी सदस्य देशों पर बाध्यकारी (Legally Binding) हैं।
2. वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Global MPI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (OPHI) द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया जाता है, जो स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान रूप से भारित आयामों (Dimensions) के अंतर्गत 10 संकेतकों का उपयोग करता है।
3. नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा जारी 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक: एक प्रगति संबंधी समीक्षा' रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय MPI में स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के 10 संकेतकों के अतिरिक्त दो राष्ट्रीय संकेतकों - 'मातृ स्वास्थ्य' (Maternal Health) और 'बैंक खाता' (Bank Account) को भी शामिल किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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चार वेदों में सबसे प्राचीन वेद कौन सा है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 323A' और 'अनुच्छेद 323B' के अंतर्गत स्थापित 'प्रशासनिक और अन्य अधिकरणों' (Tribunals) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 323A के तहत संसद को केवल संघ के मामलों और उसके अधीन लोक सेवाओं या स्थानीय प्राधिकरणों में लगे व्यक्तियों के विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए प्रशासनिक अधिकरण स्थापित करने की शक्ति प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 323B के तहत संसद और राज्य विधानमंडल दोनों को कराधान, विदेशी मुद्रा, औद्योगिक और श्रम विवाद जैसे अन्य विशिष्ट विषयों के लिए अधिकरण स्थापित करने की शक्ति प्रदान की गई है।
2. 'चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)' मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी थी कि अधिकरणों (Tribunals) के निर्णय अंतिम हैं और उनके आदेशों के विरुद्ध उच्च न्यायालयों के 'अनुच्छेद 226' के तहत रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction) का मार्ग पूरी तरह से वर्जित है, जिससे उच्च न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा की शक्ति समाप्त हो जाती है।
3. अनुच्छेद 323A के अंतर्गत स्थापित प्रशासनिक अधिकरणों के संबंध में संसद को कानून बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, और इन अधिकरणों के सदस्यों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों के निर्धारण में न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए 'अधिकरण सुधार अधिनियम' और उससे जुड़े न्यायिक दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 148' से 'अनुच्छेद 151' के अंतर्गत 'भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक' (Comptroller and Auditor General of India - CAG) के पद, स्वतंत्रता और उसकी शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है, और उसे उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए लागू होते हैं।
2. सीएजी (CAG) का कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है, और अपने पद से सेवानिवृत्त होने के बाद वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य कार्यालय या पद पर पुनः नियुक्ति का पात्र होता है।
3. सीएजी (CAG) न केवल केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के समेकित फंड (Consolidated Funds) से होने वाले सभी खर्चों की लेखा-परीक्षा करता है, बल्कि केंद्र और राज्यों के उन सभी स्वायत्त निकायों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) की भी अनिवार्य रूप से लेखा-परीक्षा करता है जिनके वित्तीय मामलों की जांच संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा विधिवत अधिकृत की गई हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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