भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights), राज्य के नीतिनिदेशक तत्वों (DPSP) और मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग III में वर्णित कुछ मूल अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं (जैसे अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30), जबकि कुछ मूल अधिकार नागरिकों एवं विदेशियों (शत्रु देश के नागरिकों को छोड़कर) दोनों को उपलब्ध हैं।
- 2. राज्य के नीतिनिदेशक तत्व (भाग IV) न्यायोचित (Justiciable) प्रकृति के होते हैं, अर्थात् यदि राज्य इन्हें लागू नहीं करता है, तो नागरिक सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके इन्हें लागू करवाने के लिए बाह्य रूप से बाध्य कर सकते हैं।
- 3. सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-क में अनुच्छेद 51ए के तहत मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया था, जिन्हें मूल रूप से 10 से बढ़ाकर 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा 11 कर दिया गया है।
- 4. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'शिक्षा का अधिकार' को न केवल मूल अधिकार के रूप में जोड़ा गया है, बल्कि इसे अनुच्छेद 51ए के तहत माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य भी बनाया गया है कि वे अपने 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30 के तहत प्रदत्त मूल अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही प्राप्त हैं, जबकि अन्य अधिकार विदेशियों को भी उपलब्ध हैं। कथन 2 असत्य है, क्योंकि राज्य के नीतिनिदेशक तत्व 'गैर-न्यायोचित' (Non-justiciable) प्रकृति के होते हैं; इन्हें न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता है। कथन 3 आंशिक रूप से असत्य है क्योंकि मूल कर्तव्य मूल रूप से 10 थे जिन्हें 86वें संशोधन द्वारा बढ़ाकर 11 किया गया, न कि 10 से घटाकर 8। कथन 4 सत्य है, क्योंकि 86वें संविधान संशोधन, 2002 के द्वारा शिक्षा के अधिकार को अनुच्छेद 21क के तहत मूल अधिकार बनाया गया तथा अनुच्छेद 51ए(k) के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए अभिभावकों का मूल कर्तव्य जोड़ा गया। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।