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शिक्षा का अधिकार (RTE Act 2009)
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पारिस्थितिकीय पिरामिड (Ecological Pyramids) और उनके प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) सदैव सीधा होता है, क्योंकि ऊर्जा का प्रवाह एकमार्गीय होता है और लिंडेनमैन के 10 प्रतिशत नियम (10% Law) के अनुसार प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर जाने पर ऊर्जा का ह्रास होता है।
  2. 2. जलीय पारितंत्र (Aquatic Ecosystem) में संख्या का पिरामिड (Pyramid of Numbers) सदैव उल्टा होता है, क्योंकि प्राथमिक उत्पादक (फाइटोप्लांकटन) की संख्या शाकाहारी जंतुओं (जूप्लांकटन) और मछलियों की तुलना में कम होती है।
  3. 3. वृक्ष पारितंत्र (Tree Ecosystem) में जैवभार का पिरामिड (Pyramid of Biomass) उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि एक विशाल वृक्ष (उत्पादक) का जैवभार उस पर निर्भर रहने वाले शाकाहारी जीवों (पक्षियों और कीटों) की कुल मात्रा से बहुत अधिक होता है।
  4. 4. बायोम या वन पारितंत्र में ऊर्जा और जैवभार दोनों के पिरामिड सामान्यतः सीधे होते हैं, किंतु समुद्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा पाया जा सकता है क्योंकि वहाँ फाइटोप्लांकटन का अल्पकालिक जैवभार जलीय जीवों के जैवभार से कम होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा बनता है क्योंकि ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम के अनुसार प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर ऊर्जा का क्षय होता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि जलीय पारितंत्र में संख्या का पिरामिड उल्टा (Inverted) होता है, न कि सीधा या अन्य प्रकार का नहीं बल्कि फाइटोप्लांकटन की संख्या अधिक होने के कारण यह उल्टा होता है (फाइटोप्लांकटन बहुतायत में होते हैं, जबकि जूप्लांकटन और मछलियाँ कम संख्या में होती हैं, अतः संख्या का पिरामिड उल्टा होता है)। कथन 3 असत्य है; वृक्ष पारितंत्र में जैवभार का पिरामिड उल्टा होता है क्योंकि एक अकेला बड़ा वृक्ष (उत्पादक) अपने ऊपर आश्रित कीटों और पक्षियों (उपभोक्ताओं) की तुलना में बहुत अधिक जैवभार रखता है। कथन 4 सत्य है, वन पारितंत्र में जैवभार और ऊर्जा पिरामिड सीधे होते हैं, जबकि महासागरों या समुद्र में जैवभार का पिरामिड उल्टा होता है क्योंकि फाइटोप्लांकटन का कुल जैवभार तेजी से उपभोग होने के कारण जूप्लांकटन से कम आंका जाता है। विस्तृत अध्ययन के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।

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→ 'समावेशी शिक्षा और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (Inclusive Education and Children with Special Needs)' के संदर्भ में, निकोलस हॉब्स (Nicholas Hobbs) द्वारा प्रतिपादित 'पारिस्थितिकीय सिद्धांत (Ecological Systems Theory) का विशेष शिक्षा में अनुप्रयोग' के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डorsolateral प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Dorsolateral Prefrontal Cortex - dlPFC), 'इंसुला' (Insula), और 'सुपीरियर टेम्पोरल सल्カス' (Superior Temporal Sulcus - STS) के बीच सामाजिक संज्ञान, पर्यावरणीय अनुकूलन और न्यूरोडाइवर्सिटी (Neurodiversity) प्रसंस्करण की सक्रियण गतिकी, तथा उता फ्रिथ (Uta Frith) द्वारा प्रतिपादित 'ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार (ASD) का न्यूरो-कोग्निटिव माइंडब्लाइंडनेस मॉडल (Mindblindness Model - Theory of Mind)' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, सार्वभौमिक डिजाइन फॉर लर्निंग (UDL: Universal Design for Learning) और विद्यार्थियों में संवेगात्मक नियमन, सामाजिक सहभागिता व सर्वांगीण समावेशन के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है? → राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के अनुसार प्राथमिक स्तर पर गणित शिक्षण का मुख्य उद्देश्य बच्चों में 'गणितीयकरण' (Mathematization) की क्षमता का विकास करना है। इस संदर्भ में RTE Act 2009 की धारा 29 के प्रावधानों के साथ मिलकर निम्नलिखित में से कौन सी शिक्षण पद्धति इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक है? → शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) किस आयु वर्ग के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है? → राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) के संस्तुतियों और निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) की धारा 29(2) के प्रावधानों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र को बढ़ावा देते हुए बच्चों के ज्ञान को उनके बाहरी जीवन से जोड़ता है, परीक्षा प्रणाली को लचीला बनाता है और संरागात्मक एवं संज्ञानात्मक विकास हेतु 'सतत एवं व्यापक मूल्यांकन' (CCE) को अनिवार्य रूप से लागू करता है, तो इन दोनों वैधानिक एवं शैक्षणिक दस्तावेजों के अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है? → भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व (DPSP)' तथा 'मूल कर्त्तव्य' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं और ये न्यायोचित (Justiciable) हैं, जबकि राज्य के नीतिनिदेशक तत्व आयरलैंड के संविधान से लिए गए हैं और गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) होने के बावजूद देश के शासन में मूलभूत हैं। 2. स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में भाग IV-A और अनुच्छेद 51-A जोड़ा गया, जिसके तहत प्रारंभ में 10 मूल कर्तव्य थे, जिन्हें बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा बढ़ाकर 11 कर दिया गया। 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में 'शिक्षा का अधिकार' मूल रूप से शामिल था, जिसे बाद में संसद द्वारा बिना किसी संविधान संशोधन के केवल एक सामान्य अधिनियम पारित करके मौलिक अधिकार बना दिया गया था। 4. नीतिनिदेशक तत्वों में शामिल 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का उल्लेख अनुच्छेद 44 में किया गया है, जो कि एक न्यायोचित प्रावधान है और इसे लागू करने के लिए राज्य सरकारें बाध्य हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व' (DPSP) तथा 'मूल कर्त्तव्य' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल अधिकार संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से प्रेरित हैं और ये मुख्य रूप से राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं, जो वादयोग्य (Justiciable) होने के कारण न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं। 2. आयरलैंड के संविधान से लिए गए राज्य के नीतिनिदेशक तत्व सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देते हैं, तथा अनुच्छेद 37 के अनुसार ये देश के शासन में मौलिक होने के साथ-साथ किसी भी न्यायालय द्वारा अनिवार्य रूप से प्रवर्तनीय (Justiciable) हैं। 3. मूल कर्त्तव्य (अनुच्छेद 51A) को स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्त्तव्य हैं जिन्हें रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) के संविधान से लिया गया है। 4. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'शिक्षा का अधिकार' मूल अधिकार है, जिसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था; इसी संशोधन के तहत अनुच्छेद 45 की विषय-वस्तु को बदला गया तथा भाग-IVक में एक नया 11वां मूल कर्त्तव्य जोड़ा गया जो 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षण की जिम्मेदारी तय करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A और 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. RTE अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के अनुसार, निजी स्कूलों (Private Schools) को भी अपनी प्रवेश क्षमता का न्यूनतम 25% हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और disadvantaged group के बच्चों के लिए बिना किसी ट्यूशन फीस के आरक्षित करना अनिवार्य है। 2. इस अधिनियम के तहत प्राथमिक स्तर ( कक्षा 1 से 5) पर शिक्षकों और छात्रों का निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) 1:40 होना अनिवार्य है, जिसमें प्रधानाध्यापक को शामिल नहीं किया जाता है। 3. RTE अधिनियम, 2009 के अनुसार, प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक किसी भी बच्चे को किसी भी बोर्ड परीक्षा में फेल नहीं किया जाएगा (No Detention Policy), हालांकि बाद में इसमें संशोधन करके राज्यों को यह अधिकार दिया गया कि वे कक्षा 5 और 8 के लिए नियमित परीक्षाएं आयोजित कर सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं? → भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत दी गई सूचियों (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची) और शिक्षा से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल संविधान (1950) में 'शिक्षा' राज्य सूची (State List) का विषय था, जिसके अंतर्गत राज्यों को स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा से संबंधित नीतियां बनाने का पूर्ण अधिकार प्राप्त था। 2. वर्ष 1976 में किए गए 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 'शिक्षा' विषय को राज्य सूची से हटाकर 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को इस पर कानून बनाने की शक्ति मिल गई। 3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21A जोड़ा गया, जिसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने को एक मौलिक अधिकार बना दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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