पारिस्थितिकीय पिरामिड (Ecological Pyramids) और उनके प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) सदैव सीधा होता है, क्योंकि ऊर्जा का प्रवाह एकमार्गीय होता है और लिंडेनमैन के 10 प्रतिशत नियम (10% Law) के अनुसार प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर जाने पर ऊर्जा का ह्रास होता है।
- 2. जलीय पारितंत्र (Aquatic Ecosystem) में संख्या का पिरामिड (Pyramid of Numbers) सदैव उल्टा होता है, क्योंकि प्राथमिक उत्पादक (फाइटोप्लांकटन) की संख्या शाकाहारी जंतुओं (जूप्लांकटन) और मछलियों की तुलना में कम होती है।
- 3. वृक्ष पारितंत्र (Tree Ecosystem) में जैवभार का पिरामिड (Pyramid of Biomass) उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि एक विशाल वृक्ष (उत्पादक) का जैवभार उस पर निर्भर रहने वाले शाकाहारी जीवों (पक्षियों और कीटों) की कुल मात्रा से बहुत अधिक होता है।
- 4. बायोम या वन पारितंत्र में ऊर्जा और जैवभार दोनों के पिरामिड सामान्यतः सीधे होते हैं, किंतु समुद्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा पाया जा सकता है क्योंकि वहाँ फाइटोप्लांकटन का अल्पकालिक जैवभार जलीय जीवों के जैवभार से कम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा बनता है क्योंकि ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम के अनुसार प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर ऊर्जा का क्षय होता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि जलीय पारितंत्र में संख्या का पिरामिड उल्टा (Inverted) होता है, न कि सीधा या अन्य प्रकार का नहीं बल्कि फाइटोप्लांकटन की संख्या अधिक होने के कारण यह उल्टा होता है (फाइटोप्लांकटन बहुतायत में होते हैं, जबकि जूप्लांकटन और मछलियाँ कम संख्या में होती हैं, अतः संख्या का पिरामिड उल्टा होता है)। कथन 3 असत्य है; वृक्ष पारितंत्र में जैवभार का पिरामिड उल्टा होता है क्योंकि एक अकेला बड़ा वृक्ष (उत्पादक) अपने ऊपर आश्रित कीटों और पक्षियों (उपभोक्ताओं) की तुलना में बहुत अधिक जैवभार रखता है। कथन 4 सत्य है, वन पारितंत्र में जैवभार और ऊर्जा पिरामिड सीधे होते हैं, जबकि महासागरों या समुद्र में जैवभार का पिरामिड उल्टा होता है क्योंकि फाइटोप्लांकटन का कुल जैवभार तेजी से उपभोग होने के कारण जूप्लांकटन से कम आंका जाता है। विस्तृत अध्ययन के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।