मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद
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अब्राहम मैस्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs) के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा युग्म उनके द्वारा बताए गए 'कमी से जुड़ी आवश्यकताओं' (Deficiency Needs या D-Needs) और 'विकास से जुड़ी आवश्यकताओं' (Growth Needs या B-Needs) का सही वर्गीकरण प्रस्तुत करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
अब्राहम मैस्लो के मानव प्रेरणा के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत में, पहले के चार स्तरों—शारीरिक आवश्यकताएं, सुरक्षा आवश्यकताएं, सामाजिक/अपनेपन की आवश्यकताएं, और सम्मान की आवश्यकता—को 'कमी आवश्यकताएं' (Deficiency Needs या D-Needs) कहा जाता है क्योंकि इनकी पूर्ति न होने पर व्यक्ति में कमी या अभाव का तनाव उत्पन्न होता है। इसके विपरीत, पदानुक्रम का सबसे सर्वोच्च स्तर 'आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) 'विकास आवश्यकता' (Growth Need या B-Need) कहलाता है, जो व्यक्ति की आंतरिक क्षमताओं औरिक विकास को निर्देशित करता है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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अब्राहम मास्लो के 'आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत' (Hierarchy of Needs Theory) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा ऐसा स्तर है जिसे मास्लो ने 'कमी की आवश्यकताएं' (Deficiency Needs या D-needs) की श्रेणी में शामिल नहीं किया है, बल्कि यह 'विकास संबंधी आवश्यकता' (Growth Need या B-need) का हिस्सा है?
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अब्राहम मास्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की शारीरिक (जैविक) आवश्यकताएँ और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताएँ पूरी हो चुकी हैं, तो पदानुक्रम में इसके ठीक बाद उभरने वाली और व्यक्ति को प्रेरित करने वाली प्राथमिक मनोवैज्ञानिक आवश्यकता निम्नलिखित में से कौन सी होगी?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण के संदर्भ में, राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद और ज्योतिराव फुले के कार्यों और उनके संगठनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और जातिगत कठोरताओं का पुरजोर विरोध किया, किंतु उन्होंने पाश्चात्य उदारवादी शिक्षा, विज्ञान और प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए आधुनिकीकरण पर विशेष बल दिया।
2. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांडों का प्रचार करना था, तथा उन्होंने वेदांत दर्शन को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय बनाने के लिए कभी भी सामाजिक सेवा या मानवतावादी कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व और सामाजिक असमानता के विरुद्ध शूद्रों व अतिशूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' के माध्यम से जाति व्यवस्था की कड़ी आलोचना की।
4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश सरकार ने 1856 में 'हिन्दू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया, जिससे समाज में विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी वैधता प्राप्त हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
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19वीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों/विचारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' और 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का विरोध करना तथा एकेश्वरवाद का प्रचार करना था।
2. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका उद्देश्य केवल धार्मिक प्रचार करना था, जबकि सामाजिक सेवा, मानवतावादी कार्यों और शिक्षा के प्रसार से इसका कोई लेना-देना नहीं था।
3. ज्योतिराव फुले ने 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की, जिसके माध्यम से उन्होंने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, छुआछूत और जातिगत असमानता का कड़ा विरोध करते हुए शूद्रों और अति-शूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के कारण ही ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1856 में 'हिू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Hindu Widows' Remarriage Act) पारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी उपागम' (Humanistic Approach) और 'व्युत्क्रमित या अनुभवजन्य अधिगम सिद्धांत' (Experiential Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'अर्थपूर्ण अनुभवात्मक अधिगम' (Significant Experiential Learning) की अवधारणा—जिसके तहत अधिगम तब होता है जब छात्र की व्यक्तिगत जिज्ञासा, उसकी अपनी समस्याओं और उसके स्व-सचेतन (Self-initiated) अनुभवों के साथ विषय-वस्तु जुड़ जाती है, और शिक्षक केवल एक 'सहायक या सुविधाप्रदाता' (Facilitator) की भूमिका निभाता है न कि एक पारंपरिक ज्ञान के प्रदाता की—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आत्म-निर्देशित अधिगम, संवेगात्मक संलग्नता और व्यक्तिगत स्वायत्तता के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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अब्राहम मास्लो के आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत (Hierarchy of Needs Theory) में 'कल्याण और आत्म-सिद्धि' (Self-Actualization) की अवस्था से ठीक पूर्व आने वाली 'सम्मान की आवश्यकताएं' (Esteem Needs) को मनोवैज्ञानिक रूप से दो उप-श्रेणियों में विभाजित किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प इन दोनों उप-श्रेणियों को सर्वाधिक सटीक रूप से दर्शाता है?
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