संज्ञानात्मक विकास
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नॉर्मन मंटेल या विशेष रूप से जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत के विपरीत लेव वायगोत्स्की के 'सांस्कृतिक-ऐतिहासिक मनोविज्ञान' के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'निजी वाक या प्राइवेट स्पीच' (Private Speech)**—जिसे उस विकासात्मक अवस्था के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक अपने स्वयं के व्यवहार, विचारों और समस्या-समाधान की प्रक्रियाओं को स्वेच्छा से निर्देशित और विनियमित करने के लिए ऊंचे स्वर में स्वयं से बातें करता है, जिसे पियाजे ने 'अहंप्रेरित वाक' (Egocentric Speech) कहकर बच्चों की अपरिपक्वता माना था, किंतु वायगोत्स्की के अनुसार यह आगे चलकर आंतरिक वाक (Inner Speech) और उच्च-स्तरीय स्व-नियमन (Self-Regulation) का आधार बनती है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संज्ञानात्मक स्वावलंबन, भाषा-चिन्तन संबंध और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
लेव वायगोत्स्की के सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत के अनुसार, 'निजी वाक' (Private Speech) बच्चों के विकास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब बच्चे किसी कठिन कार्य या समस्या का सामना करते हैं, तो वे ऊंचे स्वर में खुद से बात करके अपने विचारों को निर्देशित और विनियमित करते हैं (स्व-नियमन या Self-Regulation)। पियाजे इसे 'अहंप्रेरित वाक' मानते थे जो दूसरों के परिप्रेक्ष्य को न समझ पाने के कारण होती है और आयु के साथ लुप्त हो जाती है; इसके विपरीत, वायगोत्स्की ने यह सिद्ध किया कि यह वाक धीरे-धीरे आंतरिक वाक (Inner Speech) में परिवर्तित हो जाती है और उच्च-स्तरीय संज्ञानात्मक कार्यों का आधार बनती है। अतः विकल्प (c) इस संप्रत्यय के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ को सबसे अधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है।
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जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage) की तात्विक और तार्किक सीमाओं का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इस अवस्था की प्रमुख विशेषता 'आत्मकेन्द्रितता' (Egocentrism) और 'अपरिवर्तनीयता' (Irreversibility) के साथ-साथ 'जीववाद' (Animism) की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन वैज्ञानिक रूप से सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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पियाजे के अनुसार, 'संज्ञानात्मक विकास' (Cognitive Development) की किस अवस्था में बालक 'तार्किक रूप से' वस्तुओं और घटनाओं के बारे में चिंतन करना शुरू कर देता है?
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पियाजे के अनुसार 'आत्मसात्करण' (Assimilation) क्या है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'विकेंद्रीकरण या डीसेंट्रेशन' (Decentration)**—जिसे उस उन्नत संज्ञानात्मक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बालक किसी वस्तु, घटना या समस्या के केवल एक ही आयाम, दृष्टिकोण या दृश्य (जैसे कि केवल लंबाई या केवल चौड़ाई) पर अपना ध्यान केंद्रित करने के बजाय उसके एक से अधिक पहलुओं, आयामों और तार्किक दृष्टिकोणों पर एक साथ विचार करने और वस्तुनिष्ठ रूप से उसका आकलन करने में सक्षम हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के बहुआयामी दृष्टिकोण, संरक्षण (Conservation) की समझ और तार्किक संक्रियात्मक चिंतन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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एडवर्ड टॉलमैन (Edward Tolman) के 'चिह्न अधिगम सिद्धांत' (Sign Learning Theory or Purposive Behaviorism) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संज्ञानात्मक मानचित्र' (Cognitive Map)**—जिसे उस आंतरिक मानसिक प्रतिनिधित्व या स्थानिक स्कीमा के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से शिक्षार्थी केवल बाहरी उद्दीपकों और यांत्रिक प्रतिक्रियाओं (S-R) के आधार पर नहीं, बल्कि अपने पर्यावरण, लक्ष्यों और विभिन्न मार्गों के स्थानिक संबंधों का एक समग्र मानसिक खाका तैयार करके समस्या का समाधान करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के लचकीले ज्ञान-सर्जन, अर्थपूर्ण अन्वेषण और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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रॉबर्ट गैग्ने (Robert Gagne) के 'अधिगम के पदानुक्रम सिद्धांत' (Conditions of Learning) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संप्रत्यय अधिगम' (Concept Learning)**—जिसे उस संज्ञानात्मक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिक्षार्थी विभिन्न उद्दीपकों, वस्तुओं या घटनाओं में उनके साझा सामान्य गुणों, विशेषताओं या वर्गीय संबंधों के आधार पर अमूर्त वर्गीकरण करने और एक सामान्य नियम या श्रेणी के अंतर्गत प्रतिक्रिया देने की क्षमता अर्जित करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक वर्गीकरण, उच्च-स्तरीय चिन्तन और समस्या-समाधान के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—**'संरक्षण या कंजर्वेशन' (Conservation)**—जिसे उस तार्किक क्षमता के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके माध्यम से बच्चा यह समझता है कि किसी वस्तु के भौतिक रूप, आकार या दिखावे में परिवर्तन होने पर भी उसकी मात्रा, आयतन, द्रव्यमान या संख्या अपरिवर्तित रहती है (उदाहरण के लिए, एक ही मात्रा के पानी को अलग-अलग आकार के गिलासों में डालने पर भी पानी की मात्रा समान रहना)—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के तार्किक विन्यास, मूर्त चिंतन और गणितीय-वैज्ञानिक अवधारणाओं के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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