बुद्धि के 'त्रि-आयामी सिद्धांत' (Structure of Intellect Model) के प्रतिपादक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) के अनुसार, बुद्धि की संरचना को कितने विमाओं या आयामों (Dimensions) में वर्गीकृत किया गया है और उनके द्वारा बताए गए कुल कारकों (Factors) की प्रारंभिक संख्या कितनी थी?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित बुद्धि का 'त्रि-आयामी सिद्धांत' या बुद्धि की संरचना का मॉडल (Structure of Intellect Model) मनोविज्ञान में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। गिलफोर्ड के अनुसार, मानव बुद्धि को किसी एक सामान्य कारक या पदानुक्रम में नहीं बांधा जा सकता, बल्कि यह मानसिक योग्यताओं का एक जटिल जाल है। उन्होंने बुद्धि को तीन स्वतंत्र विमाओं या आयामों (Dimensions) में वर्गीकृत किया है, जो क्रमशः 'विषय-वस्तु' (Contents), 'संक्रिया' (Operations), और 'उत्पाद' (Products) हैं। जब इस मॉडल को पहली बार 1967 में प्रस्तुत किया गया था, तो इन तीनों आयामों के परस्पर संयोजन से कुल कारकों (Factors) की प्रारंभिक संख्या 120 थी। बाद में शोध के आधार पर इस संख्या को बढ़ाकर 150 और अंततः 180 तक किया गया, लेकिन प्रारंभिक रूप से इसे 120 कारकों के रूप में ही जाना जाता है। इस प्रकार विकल्प (b) इस प्रश्न का बिल्कुल सटीक और सही उत्तर है। अन्य विकल्प गलत हैं क्योंकि वे या तो आयामों की संख्या गलत बताते हैं या कारकों की गलत गणना प्रस्तुत करते हैं।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- विषय-वस्तु (Contents): यह वह सामग्री या जानकारी है जिस पर मानसिक संक्रियाएं की जाती हैं, जैसे- दृश्य, श्रव्य, प्रतीकात्मक, आत्मकेंद्रित और व्यवहारात्मक।
- संक्रिया (Operations): यह वह बौद्धिक प्रक्रिया है जो व्यक्ति सूचनाओं को ग्रहण करने, याद रखने या समस्याओं को हल करने में करता है, जैसे- संज्ञान, स्मृति, अभिसारी चिंतन, अपसारी चिंतन और मूल्यांकन।
- उत्पाद (Products): यह मानसिक संक्रियाओं के फलस्वरूप प्राप्त होने वाला परिणाम है, जैसे- इकाइयाँ, वर्ग, संबंध, प्रणालियाँ, रूपांतरण और निहितार्थ।
- विकल्प (a), (c) और (d) गलत हैं क्योंकि वे गिलफोर्ड द्वारा प्रतिपादित त्रि-आयामी मॉडल के मूल स्वरूप (3 विमाएं और 120 कारक) से मेल नहीं खाते हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बाल विकास एवं मनोविज्ञान में बुद्धि के बहुकारक सिद्धांतों का अध्ययन करते समय गिलफोर्ड के इस मॉडल का विशेष स्थान है। अधिक जानकारी के लिए बुद्धि के सिद्धांत को पढ़ें और समझें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, HTET) में बुद्धि के बहुआयामी और त्रि-आयामी मॉडलों से अक्सर तथ्यात्मक और अवधारणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। जे.पी. गिलफोर्ड के मॉडल में यह याद रखना बेहद जरूरी है कि उनके तीन आयाम (Content, Operation, Product) कौन-से हैं और प्रारंभिक कारकों की संख्या 120 (4 × 5 × 6) कैसे बनती है। शिक्षणशास्त्र (Pedagogy) के दृष्टिकोण से, यह सिद्धांत विद्यार्थियों में अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) और रचनात्मकता (Creativity) को विकसित करने में शिक्षकों का मार्गदर्शन करता है। परीक्षा कक्ष में इस प्रकार के प्रश्नों को हल करते समय आयामों के नामों और उनके गणितीय संयोजन को ध्यान में रखना चाहिए ताकि भ्रम से बचा जा सके।