बुद्धि के त्रिआयामी सिद्धांत (Structure of Intellect Model) के प्रणेता जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित मॉडल के अनुसार, प्रारंभिक रूप से बुद्धि के कितने आयाम या कारक बताए गए थे, और उनके इस मॉडल में 'संक्रिया' (Operations), 'विषय-वस्तु' (Contents), तथा 'उत्पाद' (Products) के अंतर्गत कुल स्वतंत्र कक्षों (Cells) की संख्या कितनी निर्धारित की गई थी?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) ने बुद्धि का त्रिआयामी सिद्धांत (Structure of Intellect Model - SI Model) वर्ष 1967 में प्रतिपादित किया था। उनके इस प्रसिद्ध मॉडल के अनुसार, मानवीय बुद्धि तीन स्वतंत्र आयामों (Dimensions) का एक जटिल संजाल है, जो 'संक्रिया' (Operations), 'विषय-वस्तु' (Contents), और 'उत्पाद' (Products) कहलाते हैं। प्रारंभिक रूप से गिलफोर्ड ने संक्रिया के अंतर्गत 5 प्रकार, विषय-वस्तु के अंतर्गत 4 प्रकार, तथा उत्पाद के अंतर्गत 6 प्रकार बताए थे। इन तीनों आयामों के परस्पर गुणन (5 × 4 × 6) से प्रारंभिक रूप से कुल स्वतंत्र कक्षों (Cells) की संख्या 120 निर्धारित की गई थी। बाद में इसमें संशोधन करके कक्षों की संख्या 150 और अंततः 180 कर दी गई, परंतु प्रारंभिक मॉडल में 3 आयाम और 120 कक्ष ही माने जाते हैं। अतः विकल्प (a) इस प्रश्न के संदर्भ में पूर्णतः सही एवं सटीक उत्तर है, जो गिलफोर्ड के मूल मनोवैज्ञानिक योगदान को दर्शाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- तीन आयाम (Three Dimensions): गिलफोर्ड के मॉडल में संक्रिया (Operations), विषय-वस्तु (Contents) और उत्पाद (Products) मुख्य स्तंभ हैं।
- प्रारंभिक कक्ष संख्या (Initial Cells): 5 (संक्रिया) × 4 (विषय-वस्तु) × 6 (उत्पाद) = 120 स्वतंत्र बौद्धिक कारक।
- बाद के संशोधन: आगे चलकर विषय-वस्तु और संक्रिया के उप-विभागों में वृद्धि के कारण कुल कक्षों की संख्या क्रमशः 150 और 180 तक पहुँची।
- विकल्प विश्लेषण: अन्य विकल्प जैसे 150 और 180 बाद के संशोधित मॉडलों से संबंधित हैं, जबकि 4 या 5 आयामों का उल्लेख भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: मनोविज्ञान में बुद्धि के स्वरूप को समझाने के लिए बहुकारकीय और संरचनात्मक उपागमों का विशेष महत्व है। गिलफोर्ड का सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि मानसिक योग्यताएं रेखीय न होकर बहुआयामी होती हैं। विस्तृत अध्ययन के लिए आप बुद्धि के सिद्धांत के अंतर्गत इस विषय को पढ़ सकते हैं।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और BPSC TRE) में बुद्धि के विभिन्न सिद्धांतों से जुड़े तथ्यात्मक एवं अवधारणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। जे.पी. गिलफोर्ड का त्रि-आयामी मॉडल (SI Model) इस दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें गणितीय संयोजन (Combinatorics) के आधार पर बौद्धिक योग्यताओं का वर्गीकरण किया गया है। परीक्षार्थियों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रारंभिक मॉडल में 120 कोष्ठक (Cells) थे, जो आगे चलकर 150 (वर्ष 1977/1988 में) और बाद में 180 हो गए। ऐसे प्रश्नों को हल करते समय 'प्रारंभिक रूप से' (Initially) शब्द पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि संशोधित आँकड़ों और मूल आँकड़ों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। कक्षा कक्ष शिक्षण में बालकों की सृजनात्मकता और divergent thinking को बढ़ावा देने में गिलफोर्ड का यह मॉडल महत्वपूर्ण आधारशिला प्रदान करता है।