प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) और बाल-केन्द्रित शिक्षा (Child-Centric Education) के तात्विक एवं दार्शनिक आधारों का गहन विश्लेषण करने पर, जॉन डेवी (John Dewey) के 'करके सीखना' (Learning by Doing) के सिद्धांत तथा कक्षा-कक्षीय प्रक्रियाओं में 'अनुभव जन्य अधिगम' (Experiential Learning) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन शैक्षिक धाराओं की सबसे सटीक और वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) और बाल-केन्द्रित शिक्षा (Child-Centric Education) आधुनिक शिक्षाशास्त्र के वे स्तंभ हैं जो जॉन डेवी के 'करके सीखना' (Learning by Doing) के दर्शन पर आधारित हैं। इस शिक्षा प्रणाली का मूल उद्देश्य बच्चों में स्वतंत्र सोच, आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) और समस्या-समाधान क्षमताओं का विकास करना है। इसके अंतर्गत छात्र निष्क्रिय श्रोता न होकर ज्ञान के सक्रिय निर्माता (Active Builders of Knowledge) होते हैं। बालक के व्यक्तिगत अनुभवों, रुचियों, क्षमताओं और आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जिससे अधिगम वास्तविक जीवन से जुड़ जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- सक्रिय सहभागिता: बाल-केन्द्रित शिक्षा में विद्यार्थी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के केंद्र में होते हैं।
- पूर्व अनुभवों का उपयोग: बच्चों के दैनिक जीवन और पूर्व ज्ञान को नए ज्ञान से जोड़ा जाता है।
- विकल्प 'ए' का खंडन: प्रगतिशील शिक्षा शिक्षक-केन्द्रित नहीं बल्कि बाल-केन्द्रित होती है।
- विकल्प 'सी' का खंडन: इसमें योगात्मक के साथ-साथ रचनात्मक मूल्यांकन (Formative Assessment) को भी समान महत्व दिया जाता है।
- विकल्प 'डी' का खंडन: यह रटने (Rote Learning) का पूर्णतः विरोध करती है और प्रायोगिक अनुप्रयोग पर बल देती है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जॉन डेवी ने अपनी प्रयोगशाला विद्यालयों (Laboratory Schools) के माध्यम से यह प्रमाणित किया कि शिक्षा केवल भविष्य की तैयारी नहीं है, बल्कि यह स्वयं जीवन है। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए देखें प्रगतिशील शिक्षा और बाल-केन्द्रित दृष्टिकोण।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, DSSSB) में प्रगतिशील शिक्षा से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। जॉन डेवी के अनुसार, विद्यालय को एक ऐसा समाज होना चाहिए जहाँ बच्चे लोकतांत्रिक मूल्यों और सहयोगात्मक अधिगम का अभ्यास कर सकें। इस दृष्टिकोण के तहत कक्षा का वातावरण लचीला, समावेशी और गतिविधि-आधारित होता है। शिक्षकों को चाहिए कि वे पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को अन्वेषण (Discovery) और प्रयोग के अवसर प्रदान करें, जिससे उनकी संज्ञानात्मक संरचना का समुचित विकास हो सके।