शैक्षिक मनोविज्ञान और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) के संदर्भ में 'रचनात्मक आकलन' (Formative Assessment), 'संकल्पात्मक आकलन' (Summative Assessment) और 'अधिगम के रूप में आकलन' (Assessment as Learning) के मध्य तात्विक, प्रक्रियात्मक और उद्देश्यपरक अंतर का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इन तीनों संप्रदायों के वास्तविक शैक्षिक और मनोवैज्ञानिक स्वरूप को सर्वाधिक सटीक रूप से स्पष्ट करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
शैक्षिक मनोविज्ञान और सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) के अंतर्गत आकलन के तीन प्रमुख स्वरूप होते हैं—अधिगम के लिए आकलन (Assessment for Learning - रचनात्मक), अधिगम का आकलन (Assessment of Learning - संकल्पात्मक), और अधिगम के रूप में आकलन (Assessment as Learning)। विकल्प (b) इन तीनों के मध्य सबसे सटीक मनोवैज्ञानिक अंतर को स्पष्ट करता है। 'अधिगम के रूप में आकलन' पूरी तरह से विद्यार्थी केंद्रित होता है जहाँ छात्र स्वयं अपने अधिगम के नियंत्रक, मूल्यांकनकर्ता और प्रबंधक बनते हैं। इसमें वे अपने ज्ञान का निर्माण करते हैं, स्व-आकलन (Self-assessment) करते हैं और अपनी अधिसंज्ञानात्मक (Metacognitive) क्षमताओं का विकास करते हैं, जिससे वे यह जान पाते हैं कि वे क्या जानते हैं और उन्हें सीखने के लिए किन रणनीतियों की आवश्यकता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- रचनात्मक आकलन (Formative Assessment): यह शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान (During instruction) होता है जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की कमियों का निदान करना और उपचारात्मक शिक्षण देना है।
- संकल्पात्मक आकलन (Summative Assessment): यह सत्र या इकाई के अंत (End of term) में होता है जिसका उद्देश्य निष्पादन का मापन, ग्रेडिंग और प्रमाणीकरण (Certification) करना है।
- अधिगम के रूप में आकलन (Assessment as Learning): छात्र इसमें सक्रिय भागीदार होते हैं और स्व-मूलکन (Self-assessment) तथा सह-पाठन आकलन (Peer assessment) के माध्यम से अपने संज्ञान का नियमन करते हैं।
- विकल्पों का विश्लेषण: विकल्प (a) में रचनात्मक और संकल्पात्मक के उद्देश्यों को उलट दिया गया है; विकल्प (c) गलत है क्योंकि रचनात्मक आकलन योगात्मक नहीं होता; और विकल्प (d) गलत है क्योंकि CCE में सह-शैक्षणिक क्षेत्रों का व्यापक मूल्यांकन अनिवार्य होता है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF 2005) और CCE की संकल्पना के अनुसार, मूल्यांकन केवल विद्यार्थियों को परखने का यंत्र नहीं है, बल्कि यह सीखने की प्रक्रिया को समृद्ध करने का एक वैज्ञानिक साधन है। समावेशी शिक्षा और बाल-केंद्रित शिक्षाशास्त्र के तहत मेटाकॉग्निशन (अधिसंज्ञानात्मक विकास) का अत्यधिक महत्व है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (CTET, UPTET, BPSC TRE) में आकलन के प्रकारों पर आधारित प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं। जब भी प्रश्न में 'स्वयं का आकलन', 'छात्रों द्वारा अपने ज्ञान का नियमन', या 'अधिसंज्ञानात्मक कौशल' (Metacognitive skills) जैसे शब्द आएं, तो वह हमेशा Assessment as Learning (अधिगम के रूप में आकलन) को इंगित करता है। इसके विपरीत, यदि शिक्षण प्रक्रिया के बीच में सुधार या निदान (Diagnosis) की बात हो, तो वह Formative Assessment होगा। सत्र के अंत में ग्रेडिंग या प्रमाण-पत्र की बात होने पर उत्तर हमेशा Summative Assessment होगा। इन तीनों के बीच का यह सूक्ष्म अंतर शिक्षकों को कक्षा कक्ष में विभेदित निर्देश (Differentiated Instruction) लागू करने में सहायता प्रदान करता है।