अधिगम के पठार (Plateau of Learning) के निर्माण के लिए उत्तरदायी मनोवैज्ञानिक एवं भौतिक कारकों तथा अधिगम के स्थानांतरण (Transfer of Learning) के विभिन्न सिद्धांतों का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन अधिगम के पठार के टूटने या समाप्त होने की प्रक्रिया और थॉर्नाडाइक के 'समान तत्वों के सिद्धांत' (Theory of Identical Elements) के आपसी संबंध को सर्वाधिक प्रामाणिक रूप से स्पष्ट करता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
अधिगम का पठार (Plateau of Learning) वह स्थिति है जहाँ सीखने की गति कुछ समय के लिए रुक जाती है या प्रगति शून्य हो जाती है। यह मानसिक थकान, प्रेरणा की कमी, या पुरानी विधियों के प्रयोग से उत्पन्न होता है। इस पठार को तोड़ने के लिए छात्र को नई प्रेरणा, उन्नत तकनीकों और उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। थॉर्नाडाइक के 'समान तत्वों का सिद्धांत' (Theory of Identical Elements) के अनुसार, पूर्व ज्ञान और नए ज्ञान के बीच जितनी अधिक समानता या समान तत्व होंगे, उतना ही सुगम और प्रभावी अधिगम का धनात्मक स्थानांतरण (Positive Transfer) होगा। विकल्प (b) यह स्पष्ट करता है कि जब अधिगमकर्ता पुरानी और अप्रभावी पद्धतियों को छोड़कर उन्नत तकनीकों और प्रेरणा को अपनाता है, तो यह सकारात्मक एवं ऊर्ध्वाधर स्थानांतरण को बढ़ावा देता है, जिससे पठार स्वतः समाप्त हो जाता है और अधिगम की गति पुनः तीव्र हो जाती है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- अधिगम का पठार अधिगम प्रक्रिया की एक स्वाभाविक अवस्था है, जो यह दर्शाती है कि प्रगति वक्र कुछ समय के लिए स्थिर हो गया है।
- थॉर्नाडाइक का समान तत्वों का सिद्धांत अधिगम के स्थानांतरण से संबंधित है, जो बताता है कि एक परिस्थिति का ज्ञान दूसरी समान परिस्थिति में सहायक होता है।
- विकल्प (a) असत्य है क्योंकि पठार केवल शारीरिक थकान से नहीं बल्कि मानसिक अरुचि और गलत शिक्षण विधियों से भी बनता है।
- विकल्प (c) और (d) भ्रामक हैं क्योंकि पठार जैविक सीमा नहीं बल्कि अनुकूलन और रणनीतिक बदलाव की आवश्यकता का संकेत है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: शैक्षिक मनोविज्ञान में थॉर्नाडाइक का संबंधवाद (Connectionism) और अधिगम वक्र तथा पठार का अध्ययन बाल विकास और शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB) में अधिगम के पठार से जुड़े प्रश्न अक्सर व्यावहारिक और विश्लेषणात्मक होते हैं। परीक्षार्थियों को यह समझना आवश्यक है कि पठार का आना अधिगम का अंत नहीं, बल्कि शिक्षण शैली में परिवर्तन और सुधारात्मक उपायों (Remedial Teaching) की मांग करता है। जब पूर्व सीखी गई कुशलताओं का उपयोग नए संदर्भों में सकारात्मक रूप से होता है (समान तत्वों के आधार पर), तो पठार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसलिए, सही मार्गदर्शन, नवीन शिक्षण सहायक सामग्री (TLM) और सकारात्मक पुनर्बलन पठार को तोड़ने के लिए अचूक अस्त्र साबित होते हैं।