उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक और विधायी इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उत्तर प्रदेश में द्विसदनीय विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की व्यवस्था है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1937 में 'भारत सरकार अधिनियम 1935' के प्रावधानों के तहत प्रांतीय विधानसभा के गठन के साथ हुई थी।
- 2. उत्तर प्रदेश विधान परिषद (Legislative Council) में कुल सदस्यों की संख्या 100 है, जो देश के किसी भी राज्य की विधान परिषद में सबसे अधिक है, तथा इसके सदस्यों का निर्वाचन विशेष निर्वाचन क्षेत्रों, स्थानीय निकायों, स्नातकों और शिक्षकों द्वारा होता है।
- 3. राज्य की प्रथम महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी थीं, जिन्होंने वर्ष 1963 से 1967 तक पद संभाला था, और वे न केवल उत्तर प्रदेश की बल्कि भारत के किसी भी राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं।
- 4. उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्यपाल श्री एच.पी. मोदी थे, और राज्य का आधिकारिक नाम 'उत्तर प्रदेश' 24 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत (United Provinces) का नाम बदलकर रखा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक, राजनीतिक और विधायी इतिहास के संदर्भ में दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 4 असत्य है। उत्तर प्रदेश में भारत शासन अधिनियम 1935 के तहत 1937 में द्विसदनीय विधानमंडल की स्थापना हुई थी। विधान परिषद में कुल 100 सदस्य हैं जो देश में सर्वाधिक हैं। सुचेता कृपलानी भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं। अतः विकल्प (c) सही है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- कथन 1 सही है क्योंकि भारत सरकार अधिनियम 1935 के प्रावधानों के अंतर्गत संयुक्त प्रांत (United Provinces) में वर्ष 1937 में प्रांतीय विधानसभा और विधान परिषद का गठन हुआ था।
- कथन 2 सही है क्योंकि यूपी विधान परिषद में 100 सीटें हैं, जो भारतीय राज्यों में सबसे अधिक हैं और इसके सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है।
- कथन 3 सही है क्योंकि सुचेता कृपलानी 1963 में यूपी की मुख्यमंत्री बनी थीं जो संपूर्ण भारत की प्रथम महिला मुख्यमंत्री थीं।
- कथन 4 गलत है क्योंकि उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्यपाल श्री एच.पी. मोदी नहीं, बल्कि श्री सरोजिनी नायडू (महिला) / श्री एच.पी. मोदी बाद में बने थे; वास्तव में स्वतंत्र भारत के प्रथम राज्यपाल श्री एच.पी. मोदी नहीं बल्कि सरोजिनी नायडू थीं (राज्यपाल के रूप में सरोजिनी नायडू प्रथम थीं)।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: भारतीय संविधान की संवैधानिक संरचना और राज्य व्यवस्था का अध्ययन हमें राज्यों के विधायी अंगों और प्रशासनिक विकास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझने में मदद करता है।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPTET, UPPSC, BPSC) में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास, प्रथम व्यक्तित्वों (मुख्यमंत्री, राज्यपाल) और विधायी संस्थाओं से जुड़े प्रश्न बहुतायत में पूछे जाते हैं। यहाँ चौथा कथन भ्रामक है क्योंकि उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्यपाल सरोजिनी नायडू थीं, न कि एच.पी. मोदी। इसलिए सावधानीपूर्वक कथनों का विश्लेषण करना आवश्यक है ताकि नकारात्मक अंकन से बचा जा सके।