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क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)
Asked 3 सप्ताह पहले · Viewed 3,076 times
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बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'शेपिंग या आकार देना' (Shaping)—जिसे उस渐进 (क्रमिक) सन्निकटन विधि (Method of Successive Approximations) के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत किसी जटिल, नवीन या अवांछित व्यवहार को सीधे तौर पर एक बार में सीखने के बजाय, लक्ष्य व्यवहार की दिशा में बढ़ने वाले प्रत्येक छोटे-छोटे क्रमिक चरणों और आंशिक प्रतिक्रियाओं (successive steps) को लगातार पुनर्बलन (Reinforcement) प्रदान करके अंतिम रूप से एक जटिल वांछित व्यवहार को आकार दिया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के जटिल कौशलों के अर्जन, सकारात्मक व्यवहार संशोधन और अनुदेशनात्मक रूपरेखा के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

बी. एफ. स्किनर का 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) अधिगम के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाता है। इस सिद्धांत के अंतर्गत 'शेपिंग' (Shaping) या 'आकार देना' एक अत्यधिक प्रभावी और व्यावहारिक तकनीक है, जिसे 'क्रमिक सन्निकटन विधि' (Method of Successive Approximations) भी कहा जाता है। इसके अनुसार, जब कोई जटिल या नया व्यवहार एक बार में सीखना संभव नहीं होता है, तब शिक्षक या प्रयोगकर्ता लक्ष्य व्यवहार की दिशा में बढ़ने वाले छोटे-छोटे और क्रमिक चरणों (successive steps) के पूरा होने पर तुरंत सकारात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) प्रदान करता है। इस प्रकार, धीरे-धीरे व्यवहार को संशोधित करते हुए अंतिम जटिल वांछित लक्ष्य तक पहुँचा जाता है। विकल्प (b) इस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया की सबसे सटीक और वैज्ञानिक व्याख्या करता है, क्योंकि यह क्रमिक चरणों और सकारात्मक पुनर्बलन की महلا को स्पष्ट करता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • शेपिंग तकनीक का मुख्य आधार 'सकारात्मक पुनर्बलन' और 'क्रमिक सन्निकटन' (Successive Approximations) है।
  • विकल्प (a) गलत है क्योंकि यह शुरुआती चरण में ही त्रुटिहीन व्यवहार की मांग करता है और दंड पर जोर देता है, जो स्किनर के सिद्धांतों के विपरीत है।
  • विकल्प (c) गलत है क्योंकि शेपिंग 'शास्त्रीय अनुबंधन' (प Pavlovian Classical Conditioning) से नहीं, बल्कि 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन' (Operant Conditioning) से संबंधित है।
  • विकल्प (d) गलत है क्योंकि नकारात्मक पुनर्बलन और सजा का अत्यधिक प्रयोग आंतरिक अभिप्रेरण को नष्ट करता है, न कि बढ़ाता है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: स्किनर का यह सिद्धांत शिक्षा में प्रोग्राम्ड लर्निंग (Programed Instruction) और शिक्षण मशीनों के विकास का आधार बना। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें बी. एफ. स्किनर का क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB) में स्किनर के सिद्धांत से जुड़े प्रश्न अक्सर व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर आधारित होते हैं। 'शेपिंग' का उपयोग विशेष शिक्षा (Special Education), बच्चों में भाषा विकास, और जटिल कौशल (जैसे लिखना या गणितीय संक्रियाएं सीखना) सिखाने के लिए किया जाता है। जब छात्र किसी कठिन कार्य को सीखने में असमर्थ होते हैं, तो शिक्षक छोटे-छोटे उप-लक्ष್ಯ बनाते हैं और हर सफल प्रयास पर शाबाशी या प्रशंसा (सकारात्मक पुनर्बलन) देकर उनके मनोबल को बढ़ाते हैं। यही कारण है कि विकल्प (b) इस प्रश्न का सबसे सही उत्तर है।

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