जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के 'संलग्नता सिद्धांत' (Attachment Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'सुरक्षित संलग्नता' (Secure Attachment)—जिसे उस प्रारंभिक भावनात्मक बंध के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत शिशु अपने प्राथमिक देखभालकर्ता (Primary Caregiver) को एक सुरक्षित आधार (Secure Base) के रूप में अनुभव करता है, देखभालकर्ता के जाने पर विचलित होता है किंतु उसकी वापसी पर आसानी से शांत होकर पुनः अपनी खोजपूर्ण गतिविधियों में संलग्न हो जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation), सामाजिक समायोजन और स्वायत्त अन्वेषण (Autonomous Exploration) के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के संलग्नता सिद्धांत (Attachment Theory) के अनुसार, 'सुरक्षित संलग्नता' (Secure Attachment) बाल विकास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संप्रत्यय है। इसमें शिशु या बालक अपने प्राथमिक देखभालकर्ता (विशेषकर माता) को एक 'सुरक्षित आधार' (Secure Base) के रूप में देखता है। जब देखभालकर्ता पास होता है, तो बालक आत्मविश्वास के साथ अपने पर्यावरण का अन्वेषण (Exploration) करता है। देखभालकर्ता के जाने पर वह थोड़ा विचलित होता है, किंतु वापसी पर सहज रूप से शांत होकर पुनः अपनी खोजपूर्ण गतिविधियों में लग जाता है। यह संवेगात्मक सुरक्षा बालक के भीतर आंतरिक कार्य प्रारूप (Internal Working Models) का निर्माण करती है, जिसके माध्यम से वह स्वयं को और दुनिया को सकारात्मक रूप से देखता है। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में, सुरक्षित संलग्नता वाले विद्यार्थी अधिक आत्मविश्वासी, सामाजिक रूप से समायोजित, सहयोगात्मक और चुनौतीपूर्ण कार्यों का सामना करने के लिए मानसिक रूप से सुदृढ़ होते हैं, जिससे अनुकूल अधिगम वातावरण का निर्माण होता है। अत: विकल्प (c) पूर्णतः सत्य और वैज्ञानिक है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- बॉल्बी के अनुसार संलग्नता के चार प्रमुख प्रकार हैं: सुरक्षित (Secure), असुरक्षित-द्वंद्वात्मक (Insecure-Ambivalent), असुरक्षित-अवरुद्ध (Insecure-Avoidant), और अव्यवस्थित (Disorganized)।
- विकल्प (a) गलत है क्योंकि शत्रुता और चिंता असुरक्षित संलग्नता (Insecure Attachment) के लक्षण हैं, सुरक्षित के नहीं।
- विकल्प (b) गलत है क्योंकि सुरक्षित संलग्नता बच्चों को जोखिम लेने और नवीन अनुभवों से कतराने के बजाय स्वतंत्र अन्वेषण के लिए प्रेरित करती है।
- विकल्प (d) गलत है क्योंकि संवेगात्मक सुरक्षा सीधे तौर पर संज्ञानात्मक विकास, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और अकादमिक प्रदर्शन को प्रभावित करती है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जॉन बॉल्बी और मेरी एंसवर्थ (Mary Ainsworth) का संलग्नता सिद्धांत यह प्रमाणित करता है कि प्रारंभिक बाल्यावस्था के संवेगात्मक संबंध आजीवन मानसिक स्वास्थ्य और अधिगम शैलियों की नींव रखते हैं। अधिक जानकारी के लिए बाल विकास के सिद्धांत और समावेशी शिक्षा के संदर्भों को पढ़ें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
सीटेट (CTET) और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में संलग्नता सिद्धांत (Attachment Theory) से संबंधित प्रश्न अक्सर व्यावहारिक कक्षा परिदृश्यों पर आधारित होते हैं। शिक्षकों को यह समझना आवश्यक है कि जिन विद्यार्थियों को घर पर सुरक्षित संलग्नता मिलती है, वे विद्यालय में शिक्षक को एक सेफ बेस मानकर बेहतर अकादमिक जोखिम उठाते हैं। इसके विपरीत, असुरक्षित संलग्नता वाले बच्चों को शिक्षक के विशेष संवेगात्मक समर्थन, धैर्य और सहानुभूति की आवश्यकता होती है ताकि वे कक्षा में स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सकें। यह प्रश्न विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन (Emotional Regulation) और सहकर्मी संबंधों की महत्ता को रेखांकित करता है।