शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)
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पावलव (Ivan Pavlov) के 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत' (Classical Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'विलोपन और स्वतः पुनःप्राप्ति' (Extinction and Spontaneous Recovery)—जिसे उस मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसके अंतर्गत बिना अनर्जित उद्दीपक (UCS) के केवल अनुबंधित उद्दीपक (CS) को बार-बार प्रस्तुत करने पर अनुबंधित अनुक्रिया (CR) का धीरे-धीरे कमजोर होकर समाप्त हो जाना 'विलोपन' कहलाता है, तथा विलोपन के बाद कुछ समय के विश्राम के पश्चात अचानक से बिना किसी नए प्रशिक्षण के अनुबंधित अनुक्रिया का पुनः प्रकट हो जाना 'स्वतः पुनःप्राप्ति' कहलाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के आदत निर्माण, व्यवहार संशोधन और स्मरण शक्ति के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
पावलव के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धांत में 'विलोपन' (Extinction) और 'स्वतः पुनःप्राप्ति' (Spontaneous Recovery) अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं हैं। जब अनुबंधित उद्दीपक (CS) को बिना यूसीएस (UCS) के बार-बार प्रस्तुत किया जाता है, तो अनुक्रिया आनी बंद हो जाती है (विलोपन)। परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि सीखी गई बात पूरी तरह मस्तिष्क से मिट गई है; कुछ समय पश्चात बिना किसी नए प्रशिक्षण के वह अनुक्रिया स्वतः प्रकट हो सकती है (स्वतः पुनःप्राप्ति)। यह इस बात को सिद्ध करता है कि तंत्रिका तंत्र में मार्ग या संबंध केवल अस्थायी रूप से बाधित या अवरुद्ध होते हैं, नष्ट नहीं। कक्षा-शिक्षण और व्यवहार संशोधन (Behavior Modification) के दृष्टिकोण से यह समझना आवश्यक है कि अवांछित आदतों को हटाने के लिए केवल विलोपन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संज्ञानात्मक और पुनर्बलन रणनीतियों का समग्र उपयोग आवश्यक है। अतः विकल्प (b) सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य कथन है।
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