मास्लो, रोजर्स एवं मानवतावाद
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कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) के 'मानवतावादी और व्यक्ति-केंद्रित अधिगम सिद्धांत' (Person-Centred Learning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय संप्रत्यय—'अर्थपूर्ण अनुभवात्मक अधिगम' (Significant / Experiential Learning)—जिसे उस प्रकार के गहरे और परिवर्तनकारी अधिगम के रूप में परिभाषित किया जाता है जो केवल तथ्यात्मक ज्ञान का संचयन नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत शिक्षार्थी के व्यक्तिगत व्यवहार, दृष्टिकोण, मूल्यों और संपूर्ण व्यक्तित्व में एक सार्थक और स्थायी परिवर्तन आता है क्योंकि यह अधिगम छात्र की अपनी ज़रूरतों, इच्छाओं और प्रासंगिक समस्याओं से सीधा जुड़ा होता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के स्व-निर्देशित अधिगम (Self-directed learning), संवेगात्मक सहभागिता और मानवतावादी पाठ्यक्रम अनुकूलन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
कार्ल रोजर्स के व्यक्ति-केंद्रित और मानवतावादी अधिगम सिद्धांत के अनुसार, 'अर्थपूर्ण या अनुभवात्मक अधिगम' (Experiential Learning) तब संभव होता है जब शिक्षार्थी को यह महसूस हो कि अध्ययन की जाने वाली सामग्री उसके व्यक्तिगत लक्ष्यों, जिज्ञासा और जीवन की वास्तविक समस्याओं से सीधे जुड़ी हुई है। रोजर्स के अनुसार, इस प्रकार के अधिगम में शिक्षक का पारंपरिक रूप से 'ज्ञान के प्रदाता' होना आवश्यक नहीं है, बल्कि उसे एक 'सहायक या सूत्रधार' (Facilitator) की भूमिका निभानी चाहिए जो कक्षा में सहानुभूतिपूर्ण समझ, बिना शर्त सकारात्मक आदर (Unconditional Positive Regard) और पूर्ण मनोवैज्ञानिक सुरक्षा का वातावरण प्रदान करे। इससे विद्यार्थियों में आंतरिक अभिप्रेरण, स्व-निर्देशित अधिगम और उनके संपूर्ण व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
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