General Science
Asked 10 hours ago · Viewed 0 times
धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सोडियम धातु को अत्यधिक अभिक्रियाशील होने के कारण किरोसिन (मिट्टी के तेल) में डुबोकर रखा जाता है, ताकि वह वायु के संपर्क में आने पर ऑक्सीजन और नमी से तीव्र प्रतिक्रिया कर स्वतः प्रज्वलित न हो सके।
- 2. नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) एक प्रबल ऑक्सीकारक है, जो अधिकांश धातुओं के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है, क्योंकि यह धातु की सतह पर उत्पन्न हाइड्रोजन को आसानी से जल में ऑक्सीकृत कर देता है।
- 3. 'थर्माइट वेल्डिंग' (Thermite welding) प्रक्रिया में एल्युमिनियम चूर्ण और फेरिक ऑक्साइड ($Fe_3O_4$ या $Fe_2O_3$) के मिश्रण का उपयोग किया जाता है, जहाँ एल्युमिनियम अपनी उच्च विद्युत-धनात्मक प्रकृति के कारण लोहे के ऑक्साइड से आयरन को अपचयन द्वारा विस्थापित करता है और अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- 4. उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) के अलावा, सोना और प्लेटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुएँ सामान्य अम्लों जैसे हाइड्रोक्लोरिक अम्ल या नाइट्रिक अम्ल में नहीं घुलती हैं, किंतु वे 'अम्लराज' (Aqua regia - सांद्र $HCl$ और सांद्र $HNO_3$ का $3:1$ मिश्रण) में घुलकर क्लोराइड संकुल बनाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि सोडियम और पोटेशियम जैसी क्षार धातुएँ इतनी अधिक अभिक्रियाशील होती हैं कि वे कमरे के तापमान पर ही वायु में मौजूद नमी और ऑक्सीजन के साथ विस्फोटक रूप से प्रतिक्रिया करती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि नाइट्रिक अम्ल ($HNO_3$) एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है और यह अधिकांश धातुओं के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस मुक्त **नहीं** करता है, बल्कि यह स्वयं अपचयित होकर नाइट्रोजन के ऑक्साइड ($NO, NO_2$) बनाता है और उत्सर्जित हाइड्रोजन को जल ($H_2$) में ऑक्सीकृत कर देता है (केवल मैग्नीशियम और मैंगनीज इसके अपवाद हैं जो अति तनु $HNO_3$ के साथ $H_2$ गैस देते हैं)। कथन 3 सही है, इसे थर्माइट प्रतिक्रिया कहा जाता है जहाँ एल्युमिनियम की लोहे के प्रति उच्च बंधुता के कारण यह गैप वेल्डिंग में प्रयुक्त पिघला हुआ लोहा प्रदान करता है। कथन 4 सही है, अम्लराज स्वर्ण और प्लेटिनम जैसी अक्रिय धातुओं को गलाने में सक्षम होता है। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण (Nutrition and Vitamins) के संदर्भ में…
← पिछला प्रश्न
यांत्रिकी (Mechanics) और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों के…
Related Questions
→
आवर्त सारणी के तत्वों के गुणों, आवर्तिता (Periodicity) और उनके परमाणु विन्यासों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) सामान्यतः घटती है, जिसका मुख्य कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि होना है, जिससे बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण बढ़ जाता है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान फ्लोरिन की तुलना में क्लोरीन का अधिक ऋणात्मक होता है, क्योंकि फ्लोरिन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण इसके 2p उपकोष में आने वाले नए इलेक्ट्रॉन के बीच अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण (Inter-electronic repulsion) अधिक होता है।
3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'मोजले' का नियम परमाणु द्रव्यमान पर आधारित है, जिसके अनुसार तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमानों के आवर्ती फलन होते हैं।
4. उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की आयनन ऊर्जा (Ionization Energy) अपने संबंधित आवर्त में सबसे अधिक होती है, क्योंकि उनके बाह्यतम कोश पूरी तरह से भरे होते हैं और उनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अत्यधिक स्थायी होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single) होते हैं, और इनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n+2}$ होता है, जबकि एल्काइन्स (Alkynes) में कम से कम एक कार्बन-कार्बन त्रि-बंध (Triple bond) उपस्थित होता है और उनका सामान्य सूत्र $C_nH_{2n-2}$ होता है।
2. ऑक्टेन संख्या (Octane number) का उपयोग डीजल इंजनों में प्रयुक्त ईंधन की गुणवत्ता को मापने के लिए किया जाता है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाला ईंधन कम 'नॉक' (Knocking) उत्पन्न करता है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और सुरक्षा की दृष्टि से इसमें जो गंधयुक्त पदार्थ मिलाया जाता है, वह एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) होता है।
4. फिशर-ट्रोप्स प्रक्रिया (Fischer-Tropsch process) एक ऐसी रासायनिक विधि है जिसके द्वारा कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन के मिश्रण (वाटर गैस) से कृत्रिम तरल हाइड्रोकार्बन (संश्लेषित ईंधन) का निर्माण किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कृत्रिम रेडियोधर्मिता (Artificial radioactivity) और नाभिकीय विखंडन (Nuclear fission) की परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कृत्रिम रेडियोधर्मिता की खोज इрен जूलियो-क्युरी (Irene Joliot-Curie) और फ्रेडरिक जूलियो-क्युरी ने की थी, जिसमें उन्होंने एल्युमिनियम पर अल्फा कणों की बौछार करके एक अस्थायी रेडियोधर्मी समस्थानिक (फास्फोरस-30) का निर्माण किया था जो पॉजिट्रॉन उत्सर्जित करता है।
2. यूरेनियम-235 पर थर्मल न्यूट्रॉन की आघात से होने वाले नाभिकीय विखंडन में द्रव्यमान क्षति (Mass defect) के कारण अपार ऊर्जा मुक्त होती है, और इस श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए मंदक के रूप में कैडमियम या बोरॉन की छड़ों का उपयोग किया जाता है।
3. ओटो हान और फ्रिट्स स्ट्रॉसबस ने यूरेनियम के न्यूट्रॉन-प्रेरित विखंडन के दौरान बेरियम जैसे हल्के तत्वों की उपस्थिति का पता लगाया था, जिसकी सैद्धांतिक व्याख्या लीट मीटनर और ओटो फ्रिश ने नाभिकीय द्रव बूँद मॉडल (Liquid drop model) के आधार पर की थी।
4. नाभिकीय रिएक्टर में शीतलक (Coolant) के रूप में प्रयुक्त होने वाले पदार्थ का मुख्य उद्देश्य रिएक्टर के कोर से उत्पन्न ऊष्मा को बाहर निकालना होता है, और इसके लिए भारी जल, पिघला हुआ सोडियम या कार्बन डाइऑक्साइड गैस का उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
जीन नियमन (Gene regulation) और ओपेरान मॉडल (Operon model) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैकब और मोनोड (Jacob and Monod) द्वारा प्रतिपादित 'लैस ओपेरान' (Lac operon) एक ऋणात्मक रूप से विनियमित प्रतिपीडीय (Inducible) प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें लैक्टोज की अनुपस्थिति में दमनकारी प्रोटीन (Repressor protein) ऑपरेटर जीन से जुड़कर संरचनात्मक जीनों के अनुलेखन को रोकता है।
2. लैस ओपेरान में 'अल्लैक्टोज' (Allolactose) एक प्रेरक (Inducer) के रूप में कार्य करता है जो दमनकारी प्रोटीन से बंधकर उसके आकार को बदल देता है, जिससे वह ऑपरेटर जीन से अलग हो जाता है और अनुलेखन प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
3. 'ट्रिप ओपेरान' (Trp operon) एक दमनकारी (Repressible) प्रणाली का उदाहरण है, जिसमें ट्रिप्टोफैन की उच्च सांद्रता सह-दमनकारी (Co-repressor) के रूप में कार्य करती है और दमनकारी प्रोटीन को सक्रिय करके ऑपरेटर से जोड़ती है, जिससे अनुलेखन रुक जाता है।
4. यूकेरियोटिक कोशिकाओं में जीन अभिव्यक्ति का नियमन केवल अनुलेखन स्तर (Transcription level) पर ही होता है, और इसमें क्रोमैटिन पुनर्रूपण (Chromatin remodeling) या हिस्टोन एसिटिलीकरण की कोई भूमिका नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.