बुद्धि का 'बहु-कारक सिद्धांत' (Multi-factor Theory) किसने दिया?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
बुद्धि के बहु-कारक सिद्धांत (Multi-factor Theory of Intelligence) के प्रतिपादक प्रसिद्ध अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ई.एल. थॉर्नडाइक (E.L. Thorndike) हैं। थॉर्नडाइक के अनुसार, बुद्धि किसी एक सामान्य योग्यता या कारक का परिणाम नहीं होती, बल्कि यह कई स्वतंत्र और विशिष्ट कारकों (Factors) का समूह होती है। उन्होंने अपने इस सिद्धांत की तुलना 'बालू के ढेर' (Sand-heap Theory) से की है, जिसका अर्थ है कि मानसिक योग्यताएँ भिन्न-भिन्न स्वतंत्र तत्वों से मिलकर बनी होती हैं। थॉर्नडाइक ने बुद्धि के अंतर्गत चार प्रमुख विशेषताओं का वर्णन किया है—स्तर (Level), क्षेत्र (Area), क्षेत्रफल (Range), और गति (Speed)। इस प्रकार, विकल्प (b) इस प्रश्न का सही उत्तर है क्योंकि यह सीधे तौर पर थॉर्नडाइक के बहु-कारक सिद्धांत से जुड़ा है, जो शिक्षा मनोविज्ञान और बाल विकास में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- थॉर्नडाइक का सिद्धांत: इसे 'बालू का सिद्धांत' या 'अणु सिद्धांत' (Atomic Theory of Intelligence) भी कहा जाता है।
- स्पीयरमैन का सिद्धांत: चार्ल्स स्पीयरमैन ने बुद्धि का 'द्वि-कारक सिद्धांत' (Two-factor Theory) प्रतिपादित किया था जिसमें 'G' कारक (सामान्य) और 'S' कारक (विशिष्ट) शामिल हैं, अतः विकल्प (c) गलत है।
- हावर्ड गार्डनर का सिद्धांत: गार्डनर ने 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Theory of Multiple Intelligences) दिया था, जिसमें 8 से 9 प्रकार की स्वतंत्र बुद्धियों का उल्लेख है, अतः विकल्प (a) गलत है।
- विकल्प (d): कैथरीन कुक इस संदर्भ में एक भ्रामक विकल्प (Distractor) के रूप में दी गई हैं।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: बुद्धि के सिद्धांतों का इतिहास मनोविज्ञान में बहुत समृद्ध रहा है। थॉर्नडाइक का बहु-कारक सिद्धांत इस बात पर बल देता है कि मनुष्य के पास विभिन्न प्रकार की स्वतंत्र मानसिक क्षमताएँ होती हैं जो अलग-अलग कार्यों को निष्पादित करती हैं। अधिक जानकारी के लिए बुद्धि के सिद्धांत और बाल विकास की पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन करें।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, और State TETs) में बुद्धि के विभिन्न सिद्धांतों और उनके प्रतिपादकों के नाम सीधे या मिलान करने वाले प्रश्नों के रूप में पूछे जाते हैं। छात्रों को अक्सर 'बहु-कारक सिद्धांत' (Multi-factor Theory - Thorndike) और 'बहु-बुद्धि सिद्धांत' (Multiple Intelligences Theory - Gardner) के बीच भ्रम होता है। बहु-कारक सिद्धांत थॉर्नडाइक द्वारा दिया गया था जो मानसिक क्षमताओं को अलग-अलग तत्वों का योग मानता है, जबकि गार्डनर का बहु-बुद्धि सिद्धांत विभिन्न डोमेन जैसे भाषाई, तार्किक, सांगीतिक आदि पर आधारित है। परीक्षा में इन दोनों के अंतर को स्पष्ट रूप से समझकर उत्तर देना चाहिए।