पियाजे के अनुसार, 'संवेदी-पेशीय अवस्था' (Sensory-Motor Stage) में बालक मुख्य रूप से कैसे सीखता है?
Detailed Explanation
📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'संवेदी-पेशीय अवस्था' (Sensory-Motor Stage) जन्म से लेकर लगभग 2 वर्ष की आयु तक चलती है। इस शुरुआती अवस्था में शिशु अपनी ज्ञानेंद्रियों (जैसे देखना, सुनना, छूना, चखना और सूंघना) और अपनी शारीरिक गतिविधियों (जैसे हाथ-पैर हिलाना, पकड़ना, चूसना) के माध्यम से दुनिया को समझते हैं और सीखते हैं। चूँकि इस चरण में भाषा और अमूर्त चिंतन का विकास नहीं हुआ होता है, इसलिए बालक की पूरी लर्निंग प्रक्रिया प्रत्यक्ष संवेदी अनुभवों और मोटर स्किल्स पर आधारित होती है। यही कारण है कि विकल्प (b) इस प्रश्न का सबसे सटीक और प्रमाणित उत्तर है।
📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:
- वस्तु स्थायित्व (Object Permanence): इस अवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है, जहाँ बच्चा समझता है कि वस्तुएं तब भी अस्तित्व में रहती हैं जब वे आँखों से ओझल हो जाती हैं।
- भाषा द्वारा सीखना (विकल्प a) 'पूर्व-संक्रियात्मक' या बाद की अवस्थाओं से जुड़ा है।
- तार्किक चिंतन (विकल्प c) 'मूर्त संक्रियात्मक' अवस्था (7-11 वर्ष) की मुख्य विशेषता है।
- किताबों द्वारा सीखना (विकल्प d) औपचारिक शिक्षा और विद्यालयी अधिगम का हिस्सा है।
📖 सैद्धांतिक संदर्भ: जीन पियाजे ने बाल विकास को चार अवस्थाओं में विभाजित किया है, जिसमें संवेदी-पेशीय अवस्था प्रथम चरण है। अधिक जानने के लिए पढ़ें जीन पियाजे का सिद्धांत और बाल विकास के अन्य महत्वपूर्ण आयाम।
🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:
शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, DSSSB और KVS) में पियाजे की संवेदी-पेशीय अवस्था से जुड़े प्रश्न अक्सर 'वस्तु स्थायित्व', 'अनुकूलन (Adaptation)', और 'आत्मसातीकरण (Assimilation)' जैसी अवधारणाओं पर आधारित होते हैं। इस स्तर पर बच्चों के व्यवहार मुख्य रूप से सहज क्रियाओं (Reflexes) से शुरू होकर जानबूझकर की जाने वाली गतिविधियों तक विकसित होते हैं। अध्यापकों को इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए बहुसंवेदी (Multi-sensory) शिक्षण सामग्रियों का उपयोग करना चाहिए ताकि उनकी ज्ञानेंद्रियों को सक्रिय रखकर प्रभावी अधिगम सुनिश्चित किया जा सके।