सृजनशीलता (Creativity)
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'सृजनात्मकता और शिक्षण विधियों' के संदर्भ में, ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण' (Four Stages of Creative Thinking)—अर्थात 'तैयारी' (Preparation), 'उद्भावन/अद्भुत काल' (Incubation), 'प्रदीप्ति/झलक' (Illumination), और 'सत्यापन/मूल्यांकन' (Verification)—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा एलेक्स एफ. ओसबर्न (Alex F. Osborn) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि-मंथन विधि' (Brainstorming Method) के मौलिक नियमों—जैसे आलोचना पर प्रतिबंध, मात्रा से अधिक गुणवत्ता या विचारों की अनियंत्रित बाढ़, तथा विचारों का संयोजन और सुधार—के पारस्परिक अंतर्संबंधों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ग्राहम वालेस (1926) द्वारा प्रतिपादित सृजनात्मक चिंतन के चार चरणों में 'तैयारी', 'उद्भावन' (Incubation), 'प्रदीप्ति' (Illumination) और 'सत्यापन' (Verification) शामिल हैं। उद्भावन चरण वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति समस्या के बारे में चेतन रूप से सोचना बंद कर देता है, लेकिन उसका अचेतन मन (Unconscious Mind) उस पर कार्य करता रहता है। एलेक्स ओसबर्न की 'बुद्धि-मंथन' (Brainstorming) तकनीक में 'आलोचना पर प्रतिबंध' (Deferment of Judgment) का नियम यह सुनिश्चित करता है कि शुरुआती चरणों में विचारों का मूल्यांकन या आलोचना न हो, जिससे अचेतन स्तर पर चल रहे उद्भावन को सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण मिलता है। अतः विकल्प (A) पूर्णतः सत्य और वैज्ञानिक है।
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'बुद्धि के त्रिय आयामी सिद्धांत' के संदर्भ में, जे.पी. गिलफोर्ड (J.P.…
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'सृजनात्मकता और शिक्षण विधियों' के संदर्भ में, ग्राहम…
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत, जब सामान्य कक्षाओं में बौद्धिक, शारीरिक या संवेदी रूप से विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों को शामिल किया जाता है, तो उनके लिए पाठ्यक्रम, शिक्षण विधियों और मूल्यांकन प्रणालियों में किए जाने वाले आवश्यक संशोधनों तथा 'विशिष्ट शिक्षा' (Special Education) की अवधारणा के बीच के तात्विक और व्यावहारिक अंतर का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस संदर्भ में सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक है?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत बच्चों की व्यक्तिगत भिन्नताओं (Individual Differences) को ध्यान में रखते हुए शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 'विभेदीकृत निर्देश' (Differentiated Instruction) के प्रमुख घटकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सामग्री (Content)' में विभेदीकरण के तहत शिक्षक छात्रों की वर्तमान योग्यता और पूर्व ज्ञान के स्तर के आधार पर पाठ्यसामग्री की जटिलता को समायोजित करता है, जैसे कठिन अवधारणाओं को सरल भागों में विभाजित करना या पठन सामग्री के विभिन्न स्तर उपलब्ध कराना।
2. 'प्रक्रिया (Process)' में विभेदीकरण का तात्पर्य विभिन्न प्रकार की शिक्षण विधियों, श्रव्य-दृश्य सामग्रियों (TLM) और गतिविधियों का उपयोग करना है ताकि दृश्य, श्रव्य और गतिसंवेदी (Kinesthetic) सभी प्रकार के अधिगम शैली वाले छात्र आसानी से सीख सकें।
3. 'उत्पाद (Product)' में विभेदीकरण के अंतर्गत छात्रों को अपनी समझ को प्रदर्शित करने के लिए केवल एक ही मानक लिखित परीक्षा का विकल्प दिया जाता है, जिससे उनकी विशिष्ट क्षमताओं का मूल्यांकन निष्पक्ष रूप से हो सके।
4. 'पर्यावरण (Environment)' में विभेदीकरण का उद्देश्य कक्षा कक्ष में एक ऐसा सकारात्मक, सुलभ और मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित वातावरण तैयार करना है जहाँ विशेष आवश्यकता वाले बच्चे (CWSN) बिना किसी भय या बाधा के सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) के अंतर्गत 'विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चे' (Children with Special Needs) के शिक्षण में 'विभेदित अनुदेशन' (Differentiated Instruction) और 'राष्ट्रीय विकलांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPWD Act, 2016) के वैधानिक तथा शैक्षणिक प्रावधानों का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई विद्यालय दृश्य, श्रवण, और बौद्धिक रूप से बाधित बालकों को मुख्यधारा की कक्षाओं में समान अवसर प्रदान करने के लिए पाठ्यचर्या, मूल्यांकन विधियों और भौतिक परिवेश में आवश्यक अनुकूलन (Accommodations and Modifications) करता है, तो इस प्रक्रिया के वैज्ञानिक और विधिक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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एक विज्ञान शिक्षक कक्षा में छात्रों की विशिष्ट अवधारणात्मक भ्रांतियों (Misconceptions) को दूर करने और अपनी शिक्षण पद्धति की प्रभावशीलता का तुरंत मूल्यांकन करने के लिए एक चक्रीय प्रक्रिया का उपयोग करता है, जिसमें योजना बनाना, क्रियान्वयन, अवलोकन और विमर्श (Reflection) शामिल हैं। शिक्षण विधियों और शोध के परिप्रेक्ष्य में इस प्रक्रिया का सबसे सटीक तकनीकी स्वरूप क्या है?
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