सृजनशीलता (Creativity)
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'बुद्धि के त्रिय आयामी सिद्धांत' के संदर्भ में, जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'बुद्धि की संरचना मॉडल' (Structure of Intellect - SOI Model) के अंतर्गत मानसिक क्षमताओं के तीन आयामों—'संक्रियाएँ' (Operations: जैसे संज्ञान, स्मृति, अभिसारी चिंतन, अपसारी चिंतन, मूल्यांकन), 'विषय-वस्तु' (Contents: जैसे आकृतिक, प्रतीकात्मक, शब्दार्थ, व्यवहारात्मक), और 'उत्पाद' (Products: जैसे इकाइयाँ, वर्ग, संबंध, प्रणालियाँ, रूपांतरण, निहितार्थ)—के वैज्ञानिक स्वरूप, तथा रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) द्वारा प्रतिपादित 'त्रितंत्र सिद्धांत' (Triarchic Theory of Intelligence) के अंतर्गत वर्णित तीन उप-सिद्धांतों—'घटकात्मक/विश्लेषणात्मक बुद्धि' (Componential/Analytical Intelligence), 'अनुभवात्मक/सृजनात्मक बुद्धि' (Experiential/Creative Intelligence), और 'व्यावहारिक/संदर्भगत बुद्धि' (Contextual/Practical Intelligence)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक कक्षा-कक्ष शिक्षण और समस्या-समाधान रणनीतियों में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) का बुद्धि की संरचना मॉडल (SOI Model) मानसिक क्षमताओं को तीन विमाओं (संक्रियाएँ, विषय-वस्तु और उत्पाद) के त्रि-विमीय मैट्रिक्स के रूप में वर्णित करता है, जिसमें अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) सृजनात्मकता का मुख्य आधार है। दूसरी ओर, रॉबर्ट स्टर्नबर्ग (Robert Sternberg) का त्रितंत्र सिद्धांत बुद्धि को विश्लेषणात्मक, सृजनात्मक और व्यावहारिक आयामों में बांटता है। ये दोनों सिद्धांत शिक्षकों को यह समझने में मदद करते हैं कि विद्यार्थियों में केवल पारंपरिक (तार्किक-गणितीय) बुद्धि ही नहीं होती, बल्कि उनकी संज्ञानात्मक क्षमताएँ बहुआयामी होती हैं। इसलिए, इनका समावेशी कक्षा-कक्ष प्रबंधन और विभेदित शिक्षण (Differentiated Instruction) में अत्यंत महत्वपूर्ण शैक्षिक निहितार्थ है।
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