सृजनशीलता (Creativity)
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'सृजनात्मकता और प्रज्ञा के संबध' के संदर्भ में, जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) द्वारा प्रतिपादित 'अपसारी चिंतन' (Divergent Thinking) के चार प्रमुख घटकों—'धाराप्रवाहता' (Fluency), 'लचीलापन' (Flexibility), 'मौलिकता' (Originality), और 'विस्तार' (Elaboration)—के मनोवैज्ञानिक स्वरूप, तथा ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरणों' (Four Stages of Creative Process)—'तैयारी' (Preparation), 'उद्भावन/प्रभवन' (Incubation), 'प्रकटीकरण/अंतर्दृष्टि' (Illumination), और 'सत्यापन/मूल्यांकन' (Verification)—के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक समस्या-समाधान आधारित कक्षा-कक्ष शिक्षण और सृजनात्मक बालकों के विकास में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यह प्रश्न UPTET के बाल विकास और शिक्षण विधि (Child Development and Pedagogy) पाठ्यक्रम के अंतर्गत 'सृजनात्मकता' (Creativity) के उच्च-स्तरीय वैचारिक पक्षों पर आधारित है। जे.पी. गिलफोर्ड ने अपसारी चिंतन (Divergent Thinking) को सृजनात्मकता का मुख्य आधार माना है, जिसके प्रमुख घटक धाराप्रवाहता (Fluency), लचीलापन (Flexibility), मौलिकता (Originality) और विस्तार (Elaboration) हैं। वहीं, ग्राहम वालेस (1926) ने सृजनात्मक चिंतन की प्रक्रिया को चार चरणों—तैयारी (Preparation), प्रभवन/उद्भावन (Incubation), अंतर्दृष्टि (Illumination), और सत्यापन (Verification)—में विभाजित किया है। 'प्रभवन' (Incubation) वह अचेतन मानसिक प्रक्रिया है जिसमें विचारों का पुनर्गठन होता है और 'अंतर्दृष्टि' (Aha! Moment) के माध्यम से 'मौलिकता' और 'लचीलापन' जैसे अपसारी घटक बाहर आते हैं। आधुनिक कक्षा-कक्ष में सृजनात्मक शिक्षण और समस्या-समाधान रणनीतियों के लिए इन दोनों सिद्धांतों का समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। अतः विकल्प (b) पूर्णतः सत्य और उपयुक्त है।
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