सृजनशीलता (Creativity)
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'सृजनात्मकता और divergent thinking के मनोवैज्ञानिक स्वरूप' के संदर्भ में, ई.पी. टॉरेंस (E.P. Torrance) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के परीक्षण' (Torrance Tests of Creative Thinking - TTCT) के अंतर्गत 'मौलिकता' (Originality), 'प्रवाहशीलता' (Fluency), 'लचीलापन' (Flexibility), और 'विस्तार' (Elaboration) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप, तथा ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन की चार चरणों की प्रक्रिया' (Four Stages of Creative Thought) के अंतर्गत 'तैयारी' (Preparation), 'उद्द्भवन' (Incubation), 'प्रदीप्ति/झलक' (Illumination), और 'सत्यापन' (Verification) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, पार्श्व चिंतन (Lateral Thinking) के संवर्धन और विद्यार्थियों में समस्या-समाधान की मौलिक क्षमताओं के विकास में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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Detailed Explanation
ई.पी. टॉरेंस के सृजनात्मकता परीक्षणों में प्रवाहशीलता (Fluency - अधिक विचार उत्पन्न करना), लचीलापन (Flexibility - विचारों में विविधता), मौलिकता (Originality - अनूठे विचार), और विस्तार (Elaboration - विचारों का विस्तार करना) मुख्य स्तंभ हैं। दूसरी ओर, ग्राहम वालेस ने सृजन प्रक्रिया के चार चरण बताए हैं: तैयारी (Preparation), उद्द्भवन (Incubation - अचेतन स्तर पर विचार मंथन), प्रदीप्ति (Illumination - 'Eureka' क्षण), और सत्यापन (Verification)। आधुनिक प्राथमिक और समावेशी कक्षाओं में इन दोनों सिद्धांतों का समन्वय बच्चों को लीक से हटकर सोचने (Divergent & Lateral Thinking) और समस्याओं के अनूठे समाधान ढूंढने में अत्यंत सहायक होता है।
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'सृजनात्मकता (Creativity) और अपसारी चिंतन के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों'…
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