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UPTET
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'सृजनशीलता और समस्या-समाधान के न्यूरो-संज्ञानात्मक सिद्धांतों' के संदर्भ में, ग्राहम वालेस (Graham Wallas) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनात्मक चिंतन के चार चरण'—'तैयारी' (Preparation), 'उद्भावन/प्रद्भवन' (Incubation), 'प्रदीप्ति' (Illumination), और 'सत्यापन' (Verification)—के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (Default Mode Network - DMN) और 'एग्जीक्यूटिव कंट्रोल नेटवर्क' (Executive Control Network - ECN) की अंतर्दृष्टि (Insight) और संज्ञानात्मक नियंत्रण के बीच की गतिकी, तथा कार्ल रोजर्स (Carl Rogers) द्वारा प्रतिपादित 'सृजनशीलता के मनोवैज्ञानिक दशाओं' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, अनुभवात्मक डिजाइन और विद्यार्थियों में अमूर्त समस्या-समाधान व नवीनता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
व्याख्या: ग्राहम वालेस द्वारा प्रतिपादित सृजनात्मक चिंतन के चार चरणों (तैयारी, उद्भावन, प्रदीप्ति, और सत्यापन) का न्यूरो-संज्ञानात्मक आधार आधुनिक तंत्रिका विज्ञान द्वारा समर्थित है। 'उद्भावन' (Incubation) के दौरान मस्तिष्क का 'डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क' (DMN) सक्रिय होता है जो अचेतन विचारों और स्मृतियों को जोड़ता है, जबकि 'सत्यापन' या मूल्यांकन के समय 'एग्जीक्यूटिव कंट्रोल नेटवर्क' (ECN) सक्रिय होता है। यह गतिकी प्राथमिक समावेशी कक्षाओं में बच्चों की सृजनात्मक क्षमता, अपसारी चिंतन और समस्या-समाधान कौशल को विकसित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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हिंदी भाषा शिक्षण और व्याकरण के संदर्भ में, पाणिनी की अष्टाध्यायी पर आधारित कात्यायन (वररुचि) द्वारा रचित 'वार्तिक' ग्रंथ की मूल भाषागत विशेषता और पाणिनी के सूत्रों में सुधार या संशोधन प्रस्तुत करने की पद्धति को निम्नलिखित में से किस रूप में सबसे सटीक रूप से परिभाषित किया जाता है?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'नैतिक विकास का सिद्धांत' के न्यूरो-संज्ञानात्मक संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) द्वारा प्रतिपादित 'नैतिक विकास के चरण' (पूर्व-पारंपरिक, पारंपरिक, और उत्तर-पारंपरिक स्तर) के न्यूरो-बायोलॉजिकल स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'वेंट्रोमेडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' (Ventromedial Prefrontal Cortex - vmPFC), 'इंसुला' (Insula), और 'एंटterior सिंगुलेट कॉर्टेक्स' (Anterior Cingulate Cortex - ACC) के बीच नैतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया, सामाजिक-संवेगात्मक सहानुभूति (Socio-emotional Empathy), और संघर्ष समाधान की सक्रियण गतिकी, तथा कैरोल गिलगन (Carol Gilligan) के 'देखभाल के नैतिकता सिद्धांत' (Ethics of Care) के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, 'न्यूरो-मॉरल ऑप्टिमाइज्ड पेडागोजी' (Neuro-Moral Optimized Pedagogy) और विद्यार्थियों में नैतिक दुविधाओं पर चर्चा (Moral Dilemma Discussions), परिप्रेक्ष्य-ग्रहण (Perspective-taking) कौशल व समग्र संवेगात्मक-संज्ञानात्मक दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था' (Formal Operational Stage: लगभग 11 वर्ष से वयस्कता तक) की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. इस अवस्था में बालकों में 'अमूर्त चिंतन' (Abstract Thinking) की क्षमता पूरी तरह विकसित हो जाती है, जिससे वे बिना किसी दृश्य या मूर्त सामग्री के केवल प्रतीकों, विचारों और परिकल्पनाओं के आधार पर समस्याओं को हल कर सकते हैं।
2. बालक 'परिकल्पनात्मक-निगमनात्मक तर्क' (Hypothetico-Deductive Reasoning) करने में सक्षम हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे किसी समस्या के समाधान के लिए पहले विभिन्न परिकल्पनाएं (Hypotheses) बनाते हैं और फिर तार्किक रूप से उनका परीक्षण करके सही निष्कर्ष पर पहुंचते हैं।
3. इस चरण के दौरान बालकों की सोच से 'अहमकेंद्रिता' (Egocentrism) पूरी तरह समाप्त हो जाती है और वे वैज्ञानिक पद्धति की तरह व्यवस्थित और तार्किक ढंग से सोचना शुरू कर देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के पाठ्यक्रम में 'अधिगम अक्षमताओं और विकासात्मक विकारों के न्यूरो-मनोवैज्ञानिक आकलन' के संदर्भ में, 'पठन वैकल्य' (Dyslexia) के न्यूरो-संज्ञानात्मक स्वरूप तथा मस्तिष्क के 'बाएं गोलार्ध के पश्च-टेम्पोरल और ऑक्सीपिटो-टेम्पोरल कॉर्टेक्स' (Left Temporo-Parietal and Occipito-Temporal Cortex) की दृश्य-शब्द रूप पहचान (Visual Word Form Recognition) और ध्वन्यात्मक प्रसंस्करण (Phonological Processing) विफलता की प्रक्रिया, तथा शेलविरा (Sally Shaywitz) द्वारा प्रतिपादित 'डिस्लेक्सिया के न्यूरोबायोलॉजिकल मॉडल' के अंतर्गत 'ध्वन्यात्मक मार्ग' और 'दृश्य मार्ग' के पारस्परिक अंतर्संबंधों तथा उनके आधुनिक प्राथमिक समावेशी कक्षा-कक्ष शिक्षण, बहुसंवेदी ऑर्टन-गिर्लिंगहैम (Orton-Gillingham) पद्धति के अनुकूलित अनुप्रयोग और विद्यार्थियों में पठन दक्षता के संवर्धन में निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त एवं सत्य है?
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सामाजिक अध्ययन (Social Studies) के अंतर्गत भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 'स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन' (Swadeshi and Boycott Movement, 1905) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस आंदोलन की औपचारिक शुरुआत 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के प्रसिद्ध टाउन हॉल में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी प्रस्ताव' पारित किए जाने के साथ हुई थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य बंगाल के विभाजन का कड़ा विरोध करना था।
2. आंदोलन के दौरान ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी के प्रचार-प्रसार के लिए बंगाल में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, ताकि पश्चिमी शिक्षा पद्धति के स्थान पर राष्ट्रीय नियंत्रण वाली शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके।
3. इस संपूर्ण आंदोलन के दौरान मुस्लिम लीग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बंगाल के विभाजन का पुरजोर विरोध करते हुए इसे राष्ट्रवाद की विजय के रूप में सराहा, जिससे हिंदू-मु मुस्लिम एकता का अभूतपूर्व उदाहरण देखने को मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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