क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)
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बी. एफ. स्किनर (B. F. Skinner) के 'क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत' (Operant Conditioning Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'सकारात्मक और नकारात्मक पुनर्बलन' (Positive and Negative Reinforcement) की अवधारणा—जिसके तहत सकारात्मक पुनर्बलन किसी वांछित व्यवहार के बाद सुखद उद्दीपक को प्रस्तुत करके उस प्रतिक्रिया की आवृत्ति को बढ़ाता है, जबकि नकारात्मक पुनर्बलन किसी अप्रिय या दंडात्मक परिस्थिति को हटाकर या उससे मुक्ति दिलाकर उसी अनुक्रिया की संभावना को प्रबल करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के अनुकूली व्यवहार, आंतरिक अनुशासन और अधिगम वक्र के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
बी. एफ. स्किनर के क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत के अनुसार, 'नकारात्मक पुनर्बलन' (Negative Reinforcement) किसी अप्रिय या कष्टदायक उद्दीपक को हटाकर (या उससे बचाकर) वांछित व्यवहार की आवृत्ति या संभावना को बढ़ाता है। यह 'सजा' (Punishment) से बिल्कुल अलग है; जहाँ सजा का उद्देश्य किसी अवांछित व्यवहार को कमजोर करना या रोकना होता है, वहीं नकारात्मक पुनर्बलन सही या वांछित अनुक्रिया की संभावना को मजबूत (Strengthen) करता है। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में, शिक्षक गृहकार्य पूरा करने पर किसी अप्रिय शर्त (जैसे अतिरिक्त अभ्यास या मौखिक पूछताछ) से छूट देकर नकारात्मक पुनर्बलन का प्रभावी उपयोग कर सकते हैं।
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