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बाल विकास की अवधारणा सभी देखें (644) वृद्धि एवं विकास: अवधारणा और अंतर61 विकास के सिद्धांत (Principles)148 विकास को प्रभावित करने वाले कारक12 वंशानुक्रम एवं वातावरण238 विकास की अवस्थाएँ32 बाल अध्ययन की विधियाँ3 मिश्रित: बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र150
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अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
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वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
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बाल अधिकार एवं संरक्षण सभी देखें (44) बाल अधिकार (UNCRC)1 POCSO अधिनियम एवं बाल सुरक्षा0 शिक्षा का अधिकार (RTE Act 2009)33 किशोर न्याय एवं अन्य कानून0 बाल कल्याण योजनाएँ (ICDS, मध्याह्न भोजन आदि)10
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सिगमंड फ्रायड
Asked 3 महीने पहले · Viewed 3,888 times
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सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytic Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित व्यक्तित्व की संरचना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और केंद्रीय घटक—'अहम (Ego)'—जिसे वास्तविकता के सिद्धांत (Reality Principle) द्वारा संचालित, इड (Id) की पाशविक और तात्कालिक इच्छाओं तथा पराअहम (Superego) के कठोर नैतिक प्रतिबंधों के बीच मध्यस्थता करने वाली मानसिक शक्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक नियमन, तार्किक निर्णय और अनुकूली समायोजन के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?

Detailed Explanation

सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत के अनुसार, व्यक्तित्व के तीन मुख्य घटक हैं: इड (Id), अहम (Ego) और पराअहम (Superego)। इसमें 'अहम' (Ego) वास्तविकता के सिद्धांत (Reality Principle) पर कार्य करता है। यह 'इड' की तात्कालिक और अवास्तविक इच्छाओं तथा 'पराअहम' के अत्यधिक कठोर नैतिक नियमों के बीच एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाता है। कक्षा-कक्षीय परिवेश में एक मजबूत और संतुलित 'अहम' विद्यार्थियों को तार्किक निर्णय लेने, संवेगों को नियंत्रित करने और सामाजिक-शैक्षणिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से समायोजन (Adjustment) करने में सक्षम बनाता है।
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