विकास के सिद्धांत (Principles)
Asked 2 months ago · Viewed 15 times
बाल विकास के परिप्रेक्ष्य में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत की किस अवस्था में व्यक्ति यह मानता है कि सामाजिक नियमों का पालन करना समाज में सुव्यवस्था बनाए रखने और कर्तव्य का पालन करने के लिए अनिवार्य है, जो कि 'उत्तर-रूढ़िगत' या 'पारंपरिक' स्तर का हिस्सा है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के पारंपरिक स्तर (Conventional Level) के अंतर्गत 'कानून और व्यवस्था अभिविन्यास' (Law and Order Orientation - Stage 4) आता है। इस अवस्था में व्यक्ति का यह मानना होता है कि नियमों और कानूनों का पालन करना समाज में व्यवस्था बनाए रखने, अधिकार बनाए रखने और अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन करने के लिए आवश्यक है।
अगला प्रश्न →
बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के संदर्भ में, 'कोहलबर्ग के नैतिक विकास के…
← पिछला प्रश्न
जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत की आलोचना…
Related Questions
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए कैरोल गिलिगन ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग के मूल अध्ययन में केवल पुरुषों को शामिल किए जाने के कारण उनका सिद्धांत 'न्याय के दृष्टिकोण' (Justice Perspective) पर अत्यधिक बल देता है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और संबंधों के दृष्टिकोण' (Care and Perspective) पर आधारित होता है। इस वैचारिक भिन्नता और कोहलबर्ग के सिद्धांत के अंतिम स्तर (सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास) तथा गिलिगन के देखभाल के नैतिकता के चरणों के बीच के अंतर्संबंध का गहन विश्लेषण करने पर, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
→
कोहलबर्ग के अनुसार, सही और गलत के प्रश्न के बारे में निर्णय लेने में शामिल चिंतन प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development) के विभिन्न स्तरों और चरणों के संदर्भ में, यदि कोई व्यक्ति यह मानता है कि नियमों और कानूनों का पालन केवल इसलिए किया जाना चाहिए ताकि समाज में व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार का सामाजिक विघटन न हो, तो कोहलबर्ग के किस स्तर और चरण का यह सबसे सटीक प्रतिनिधित्व करता है?
→
कोहलबर्ग के अनुसार, बच्चा किस अवस्था में दंड से बचने के लिए नियमों का पालन करता है?
→
बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों के संदर्भ में 'नियोजित विकास का सिद्धांत' (Principle of Predictable Direction) और उसके स्वरूप के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस सिद्धांत के अंतर्गत विकास की दिशा सामान्यतः सिर से पैर की ओर ('मस्तकोधोमुखी' या Cephalocaudal) तथा शरीर के केंद्रीय भाग से दूरस्थ अंगों की ओर ('निकूरस्थ' या Proximodistal) होती है।
2. विकास की दर सभी बालकों में एक समान और रैखिक (Linear) गति से चलती है, अर्थात आयु के हर पड़ाव पर शारीरिक और मानसिक विकास का प्रतिशत बिल्कुल एक जैसा होता है।
3. यद्यपि विकास की गति व्यक्तिगत भिन्नताओं के कारण भिन्न हो सकती है, तथापि विकास के चरण और प्रतिमान (Patterns) दुनिया भर के सभी बच्चों में सार्वभौमिक और पूर्वानुमानित (Predictable) होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
→
बाल विकास के विभिन्न सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विकास की प्रक्रिया निरंतरता के सिद्धांत (Principle of Continuity) के अनुसार गर्भधारण से लेकर मृत्युपर्यंत तक बिना रुके क्रमिक रूप से चलती रहती है, यद्यपि विकास की गति सभी अवस्थाओं में एक जैसी तीव्र नहीं होती है।
2. 'समीप-दूराभिमुख विकास' (Proximodistal Trend) के नियम के अंतर्गत विकास का क्रम शरीर के केंद्र से शुरू होकर बाहर की ओर यानी सिर से पैर की दिशा (Cephalocaudal Trend) में अग्रसर होता है, जिसमें पहले रीढ़ की हड्डी और आंतरिक अंग विकसित होते हैं और बाद में हाथ-पैर की उंगलियां।
3. विकास की दर व्यक्तिगत भिन्नता (Individual Differences) के कारण प्रत्येक बालक में अलग-अलग हो सकती है, किंतु सामान्य रूप से विकास के सभी प्रतिमान (Patterns) और अनुक्रम (Sequences) मानव जाति के सभी बालकों में एक जैसे होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
→
विकास का 'निकट-दूर' (Proximodistal) सिद्धांत क्या दर्शाता है?
→
बच्चे के विकास का 'मस्तकाधोमुखी' (Cephalocaudal) सिद्धांत क्या कहता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.