अधिगम बनाम परिपक्वता: अंतर और तुलना
अधिगम अनुभव और अभ्यास से व्यवहार में आया स्थायी परिवर्तन है, जबकि परिपक्वता शरीर और तंत्रिका तंत्र के आंतरिक जैविक विकास से स्वतः होने वाला परिवर्तन है। परिपक्वता सीखने के लिए तत्परता तैयार करती है।
अधिगम और परिपक्वता में मुख्य अंतर
| आधार | अधिगम | परिपक्वता |
|---|---|---|
| स्रोत | अनुभव, अभ्यास और प्रशिक्षण। | आंतरिक जैविक विकास और वंशानुक्रम। |
| अभ्यास की ज़रूरत | अभ्यास या अनुभव आवश्यक है। | अभ्यास के बिना भी स्वाभाविक रूप से आता है। |
| उदाहरण | पढ़ना, साइकिल चलाना, भाषा के नए शब्द सीखना। | बैठना, चलना, दाँत निकलना, यौवन आना। |
| समय और क्रम | अवसर और प्रयास पर निर्भर। | निश्चित क्रम और अपेक्षाकृत निश्चित समय। |
| वातावरण का प्रभाव | अधिक, प्रशिक्षण से तेज़ या धीमा हो सकता है। | कम, मुख्यतः जैविक घड़ी से चलती है। |
| स्थायित्व | भूलने की संभावना, दोहराव से मज़बूती। | जैविक रूप से स्थायी। |
| आपसी संबंध | परिपक्वता से पहले सिखाना अक्सर व्यर्थ होता है। | अधिगम के लिए तत्परता तैयार करती है। |
तत्परता का महत्त्व
जब तक बच्चे की उँगलियाँ और आँख-हाथ का तालमेल परिपक्व न हो, उसे सुंदर लिखावट सिखाना कठिन है। इसलिए शिक्षण का समय बच्चे की परिपक्वता के अनुरूप तय किया जाता है। यह थॉर्नडाइक के तत्परता के नियम से भी जुड़ता है।
परीक्षा के लिए याद रखें
अनुभव और अभ्यास से सीखा गया अधिगम, जैविक विकास से स्वतः आने वाला परिपक्वता। परिपक्वता अधिगम की तैयारी करती है, पर अधिगम के बिना कौशल पूरा नहीं होता।
अभ्यास प्रश्न
संदर्भ
- NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें
- एडवर्ड थॉर्नडाइक, Educational Psychology (1913)