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आत्मसातीकरण बनाम समायोजन: अंतर और तुलना

आत्मसातीकरण में नई जानकारी बिना ढाँचा बदले मौजूदा स्कीमा में जुड़ जाती है, जबकि समायोजन में नई जानकारी के अनुसार स्कीमा बदलना या नया बनाना पड़ता है। पियाजे के अनुसार दोनों मिलकर अनुकूलन बनाते हैं।

आत्मसातीकरण और समायोजन में मुख्य अंतर

आत्मसातीकरण बनाम समायोजन — तुलना तालिका
आधारआत्मसातीकरणसमायोजन
अर्थनई जानकारी को पुराने स्कीमा में शामिल कर लेना।नई जानकारी के अनुसार स्कीमा को बदलना या नया स्कीमा बनाना।
स्कीमा पर असरस्कीमा जैसा था वैसा रहता है, उसमें केवल जानकारी जुड़ती है।स्कीमा में परिवर्तन या नए स्कीमा का निर्माण होता है।
कब होता हैजब नया अनुभव पुरानी समझ से मेल खाता हो।जब नया अनुभव पुरानी समझ में न बैठे और उलझन पैदा करे।
उदाहरणबच्चा गाय को भी कुत्ता कह देता है, क्योंकि दोनों चार पैरों वाले हैं।टोके जाने पर बच्चा गाय के लिए अलग स्कीमा बना लेता है।
मानसिक स्थितिसंतुलन जैसी स्थिति, उलझन कम।असंतुलन या उलझन से शुरू होता है, फिर नया संतुलन बनता है।
अनुकूलन में स्थानअनुकूलन की पहली प्रक्रिया।अनुकूलन की दूसरी प्रक्रिया, जो पहली से बात न बनने पर चलती है।
विकास में भूमिकामौजूदा ज्ञान को मज़बूत करता है।ज्ञान को अगले स्तर पर ले जाता है।

दोनों का आपसी संबंध

दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं, पर अकेली कोई काम नहीं करती। इनके बीच संतुलन बनाने की क्रिया को पियाजे ने संतुलनीकरण कहा है। जहाँ आत्मसातीकरण स्थिरता देता है, वहीं समायोजन विकास की गुंजाइश।

परीक्षा के लिए याद रखें

स्कीमा वही रहे और जानकारी जुड़े तो आत्मसातीकरण। स्कीमा खुद बदल जाए तो समायोजन। दोनों का संतुलन संतुलनीकरण कहलाता है।

अभ्यास प्रश्न

संदर्भ
  • जीन पियाजे, The Origins of Intelligence in Children (अंग्रेज़ी अनुवाद 1952)
  • NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें