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समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) क्या है?

समावेशी शिक्षा वह व्यवस्था है जिसमें सभी बच्चे, चाहे उनकी क्षमता, भाषा, जाति, लिंग या विकलांगता कुछ भी हो, एक ही नियमित कक्षा में साथ पढ़ते हैं और विद्यालय हर बच्चे की ज़रूरत के अनुसार ख़ुद को ढालता है।

समावेशी शिक्षा: विस्तृत व्याख्या

समावेशी शिक्षा को समझें

इसमें बच्चे को व्यवस्था के अनुकूल बनाने के बजाय व्यवस्था को बच्चे के अनुकूल बनाया जाता है। यूनेस्को के सलामांका वक्तव्य (1994) ने इसे विश्व स्तर पर बढ़ावा दिया। भारत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इसी दिशा में आगे बढ़ते हैं।

याद रखने योग्य बिंदु

  • सभी बच्चे एक ही कक्षा में, सहायता के साथ
  • सलामांका वक्तव्य 1994 से वैश्विक पहचान
  • विद्यालय बदलता है, बच्चा नहीं

उदाहरण

कक्षा में दृष्टिबाधित बच्चे के लिए बड़े अक्षर वाली पाठ्य सामग्री और बैठने की सही जगह दी जाती है, और सहपाठी उसके साथ समूह कार्य करते हैं। उसे अलग विशेष विद्यालय में नहीं भेजा जाता।

परीक्षा में कैसे पूछा जाता है

एकीकरण और समावेशन का अंतर पूछा जाता है: एकीकरण में बच्चे को व्यवस्था के अनुकूल ढलना होता है, समावेशन में व्यवस्था बच्चे के अनुकूल बदलती है। सलामांका 1994 और RPwD 2016 का साल याद रखें।

समावेशी शिक्षा पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)

समावेशी शिक्षा के सभी प्रश्न देखें →

तुलना पढ़ें

संबंधित अवधारणाएँ

संदर्भ
  • यूनेस्को, सलामांका वक्तव्य और कार्य-ढाँचा (1994)
  • भारत सरकार, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016