समावेशी बनाम एकीकृत शिक्षा: अंतर और तुलना
एकीकृत शिक्षा में विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को सामान्य कक्षा में रखा जाता है पर उसे ही व्यवस्था के अनुकूल ढलना होता है। समावेशी शिक्षा में विद्यालय और कक्षा बच्चे की ज़रूरत के अनुसार बदलते हैं।
समावेशी शिक्षा और एकीकृत शिक्षा में मुख्य अंतर
| आधार | समावेशी शिक्षा | एकीकृत शिक्षा |
|---|---|---|
| मूल सोच | बच्चे को सामान्य कक्षा में जगह देना। | हर बच्चे का समान रूप से स्वागत और भागीदारी। |
| अनुकूलन किसे करना है | बच्चे को व्यवस्था के अनुकूल होना होता है। | व्यवस्था को बच्चे के अनुकूल बदलना होता है। |
| लक्षित बच्चे | मुख्यतः दिव्यांग बच्चे। | सभी बच्चे: दिव्यांग, वंचित, भाषाई और सामाजिक विविधता वाले। |
| पाठ्यक्रम और शिक्षण | आम तौर पर सामान्य पाठ्यक्रम, सीमित बदलाव। | लचीला पाठ्यक्रम, विविध शिक्षण विधियाँ और अनुकूलन। |
| शिक्षक की भूमिका | विशेष शिक्षक पर अधिक निर्भरता। | सामान्य शिक्षक की भी सीधी ज़िम्मेदारी, विशेष शिक्षक का सहयोग। |
| भारत में पहचान | 1974 की एकीकृत शिक्षा योजना (IEDC) इसी सोच की थी। | सलामांका 1994 से वैश्विक स्वीकृति, RTE 2009 और RPwD 2016 में समर्थन। |
| सामाजिक संदेश | सुविधा के रूप में सहभागिता। | अधिकार के रूप में सहभागिता। |
एक ही दिशा में विकास
एकीकरण को समावेशन की ओर पहला क़दम माना जाता है। समावेशन इससे आगे जाकर यह सवाल बदल देता है: बच्चे को कक्षा के लायक कैसे बनाएँ की जगह कक्षा को सबके लायक कैसे बनाएँ।
परीक्षा के लिए याद रखें
बच्चा बदले तो एकीकृत, व्यवस्था बदले तो समावेशी। सलामांका वक्तव्य (1994) समावेशी शिक्षा से और IEDC (1974) एकीकृत शिक्षा से जुड़ा माना जाता है।
अभ्यास प्रश्न
- समावेशी शिक्षा पर MCQ
- एकीकृत शिक्षा पर MCQ
- अवधारणा: समावेशी शिक्षा
- अवधारणा: विशेष आवश्यकता वाले बच्चे
संदर्भ
- यूनेस्को, सलामांका वक्तव्य (1994)
- भारत सरकार, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016