नैतिक एवं चारित्रिक विकास
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लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित अवस्थाओं और उनके लक्षणों पर विचार कीजिए:
- 1. 'उत्कृष्ट नैतिकता का स्तर' (Post-conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण में व्यक्ति यह मानता है कि नियम और कानून समाज के कल्याण के लिए लचीले अनुबंध हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बड़े हितों के विरुद्ध हो, तो उसमें परिवर्तन किया जा सकता है।
- 2. 'पारंपरिक स्तर' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' (Good Boy-Good Girl) अभिविन्यास में बालक का मुख्य उद्देश्य दूसरों की नज़रों में aprobación (स्वीकृति) प्राप्त करना और सामाजिक रूप से 'अच्छा' दिखना होता है, ताकि वह दूसरों की अपेक्षाओं पर खरा उतर सके।
- 3. कोहलबर्ग के सिद्धांत के अनुसार, सभी वयस्क और किशोर सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) के उच्चतम चरण तक अवश्य पहुँच जाते हैं, क्योंकि यह जैविक परिपक्वता का एक अनिवार्य और अंतिम परिणाम है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: कोहलबर्ग के उत्तर-पारंपरिक स्तर (Post-conventional level) के 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' अभिविन्यास में व्यक्ति यह समझता है कि कानून सामाजिक भलाई के लिए बनाए गए हैं और यदि वे अन्यायपूर्ण हैं तो उन्हें बदला जाना चाहिए। कथन 2 सही है: पारंपरिक स्तर के 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' चरण में व्यक्ति दूसरों से अनुमोदन पाने और सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए प्रेरित होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि कोहलबर्ग के अनुसार सभी व्यक्ति सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (अंतिम चरण) तक नहीं पहुँच पाते हैं; यह चरण बहुत कम लोगों द्वारा ही प्राप्त किया जाता है।
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए मनोवैज्ञानिक कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग का प्रतिमान पुरुषों के न्याय-उन्मुख (Justice-oriented) दृष्टिकोण पर अत्यधिक केंद्रित है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और जिम्मेदारी' (Care and Responsibility) के संदर्भात्मक और संबंधात्मक दृष्टिकोण पर आधारित होता है। गिलिगन के इस नारीवादी और विकासात्मक परिप्रेक्ष्य के अनुसार, महिलाओं के नैतिक तर्क का सर्वोच्च और परिपक्वतम स्तर कोहलबर्ग के किस स्तर या वैचारिक प्रतिमान से सीधे तौर पर भिन्नता रखता है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-Conventional Level) के द्वितीय चरण—'विवेक और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation)—की दार्शनिक और तात्विक गहराई का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इस चरण में व्यक्ति के नैतिक निर्णय और न्याय की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अनुसार, पारंपरिक नैतिकता के स्तर (Conventional Level) के अंतर्गत आने वाले चौथे चरण यानी 'कानून और व्यवस्था अभिविन्यास' (Law and Order Orientation) की सबसे प्रमुख और विशिष्ट विशेषता निम्नलिखित में से कौन सी है?
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लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) के अंतर्गत प्रतिपादित 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के चरम चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation)—की अवधारणा, जिसके तहत व्यक्ति किसी सामाजिक नियम या कानून के अंधे अनुपालन के बजाय अपने स्वयं के अंतःकरण, सार्वभौमिक मानवाधिकारों, न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के आंतरिक रूप से चयनित स्व-निर्धारित नैतिक सिद्धांतों के आधार पर सही और गलत का निर्णय करता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के उच्च-स्तरीय आलोचनात्मक नैतिक चिंतन, लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वायत्त निर्णय-निर्माण के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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बच्चों में नैतिक विकास के संदर्भ में, लॉरेंस कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत की 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) अवस्था के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन सी प्रमुख विशेषताएँ सम्मिलित हैं?
1. इस स्तर पर व्यक्ति के नैतिक निर्णय बाहरी सामाजिक नियमों या अधिकार से स्वतंत्र होते हैं, और व्यक्ति अपने स्वयं के विवेक तथा सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों के आधार पर सही या गलत का निर्धारण करता है।
2. इस चरण के अंतर्गत आने वाले 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) अवस्था में व्यक्ति यह समझता है कि कानून सामाजिक भलाई के लिए बनाए गए हैं, और यदि कोई कानून मानवाधिकारों का हनन करता है, तो उसमें परिवर्तन किया जा सकता है।
3. इस स्तर की अंतिम अवस्था 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation) है, जहाँ व्यक्ति किसी बाहरी सजा या प्रशंसा के लिए नहीं, बल्कि अपने आंतरिक अंतरात्मा (Conscience) और न्याय, मानवाधिकार तथा समानता के सार्वभौमिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) की अंतिम अवस्था यानी 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःचेतना अभिविन्यास' (Universal Ethical Principle Orientation) की निम्नलिखित में से कौन-सी विशिष्ट विशेषताएँ हैं?
1. इस स्तर पर व्यक्ति के नैतिक निर्णय किसी बाहरी सामाजिक नियम, कानून या अधिकार पर नहीं, बल्कि स्व-चयनित नैतिक सिद्धांतों पर आधारित होते हैं जो न्याय, मानवाधिकारों और आपसी सम्मान के सार्वभौमिक विचारों से निर्देशित होते हैं।
2. व्यक्ति कानून और व्यवस्था को परम सत्य मानता है और उसका मानना है कि समाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए हर परिस्थिति में कानूनों का अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए, भले ही वे अन्यायपूर्ण क्यों न हों।
3. इस अवस्था में व्यक्ति अपनी अंतरात्मा (Conscience) की आवाज के प्रति उत्तरदायी होता है और यदि कोई सामाजिक कानून मानवीय गरिमा या सार्वभौमिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध जाता है, तो वह ऐसे कानून का शांतिपूर्ण विरोध करने की नैतिक क्षमता रखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के नैतिक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के 'सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार' (Social Contract and Individual Rights) चरण की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. इस चरण में व्यक्ति का यह मानना होता है कि नियम और कानून समाज के आपसी समझौते या अनुबंध का परिणाम हैं, इसलिए यदि कोई कानून मानवाधिकारों या समाज के बहुसंख्यक कल्याण की रक्षा करने में असफल रहता है, तो उसे बदला जा सकता है।
2. इस स्तर पर नैतिकता पूरी तरह से बाहरी दंड, पुरस्कार या सामाजिक प्रतिष्ठा की चाह पर आधारित होती है, जहाँ व्यक्ति केवल इसलिए नियमों का पालन करता है ताकि वह कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाले अधिकारियों की नजर में अच्छा बन सके।
3. यह चरण कोहलबर्ग के सिद्धांत के स्तर-III (Level III) के अंतर्गत आता है, जो सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) से ठीक पहले की अवस्था है, और इसमें वैधानिक कानूनों की तुलना में सामाजिक न्याय एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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कोहलबर्ग (Lawrence Kohlberg) के 'नैतिक विकास के सिद्धांत' (Theory of Moral Development) की विभिन्न अवस्थाओं और उनके स्तरों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पूर्व-पारंपरिक नैतिकता' (Pre-conventional Morality) के दूसरे चरण यानी 'व्यक्तिवाद और विनिमय' (Individualism and Exchange) के अंतर्गत बालक का नैतिक तर्क मुख्य रूप से पुरस्कार प्राप्त करने और दंड से बचने की व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर आधारित होता है, जिसे 'जैसी करनी वैसी भरनी' की भावना भी कहते हैं।
2. 'पारंपरिक नैतिकता' (Conventional Morality) के अंतर्गत आने वाले 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की' (Good Interpersonal Relationships) अभिविन्यास में व्यक्ति का मुख्य उद्देश्य दूसरों की नज़रों में aprobación (स्वीकृति) प्राप्त करना और सामाजिक रूप से स्वीकृत अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करना होता है।
3. 'उत्तर-पारंपरिक नैतिकता' (Post-conventional Morality) के अंतिम और उच्चतम चरण यानी 'सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत' (Universal Ethical Principles) में व्यक्ति बाहरी नियमों या कानूनों की परवाह किए बिना अपने स्वयं के विवेक और न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों के आधार पर सही या गलत का निर्णय लेता है, भले ही वे कानून समाज के नियमों के विरुद्ध क्यों न हों।
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