शिक्षा का अधिकार (RTE Act 2009)
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भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत दी गई सूचियों (संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची) और शिक्षा से जुड़े प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मूल संविधान (1950) में 'शिक्षा' राज्य सूची (State List) का विषय था, जिसके अंतर्गत राज्यों को स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा से संबंधित नीतियां बनाने का पूर्ण अधिकार प्राप्त था।
- 2. वर्ष 1976 में किए गए 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 'शिक्षा' विषय को राज्य सूची से हटाकर 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) में स्थानांतरित कर दिया गया, जिससे केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को इस पर कानून बनाने की शक्ति मिल गई।
- 3. 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21A जोड़ा गया, जिसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने को एक मौलिक अधिकार बना दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. मूल संविधान में शिक्षा राज्य सूची का ही विषय था। 2. आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन, 1976 के माध्यम से शिक्षा, वन, वन्यजीवों और पक्षियों का संरक्षण, नाप-तौल और न्याय प्रशासन आदि विषयों को राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया था। 3. 86वें संविधान संशोधन, 2002 के द्वारा अनुच्छेद 21-क (Article 21A) को जोड़कर 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया और इसी संशोधन के तहत नीति निर्देशक तत्वों (Article 45) में संशोधन तथा मौलिक कर्तव्यों (Article 51A-k) में 11वां मूल कर्तव्य जोड़ा गया था।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights), राज्य के नीतिनिदेशक तत्वों (DPSP) और मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग III में वर्णित कुछ मूल अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं (जैसे अनुच्छेद 15, 16, 19, 29 और 30), जबकि कुछ मूल अधिकार नागरिकों एवं विदेशियों (शत्रु देश के नागरिकों को छोड़कर) दोनों को उपलब्ध हैं।
2. राज्य के नीतिनिदेशक तत्व (भाग IV) न्यायोचित (Justiciable) प्रकृति के होते हैं, अर्थात् यदि राज्य इन्हें लागू नहीं करता है, तो नागरिक सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय में याचिका दायर करके इन्हें लागू करवाने के लिए बाह्य रूप से बाध्य कर सकते हैं।
3. सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IV-क में अनुच्छेद 51ए के तहत मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया था, जिन्हें मूल रूप से 10 से बढ़ाकर 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा 11 कर दिया गया है।
4. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'शिक्षा का अधिकार' को न केवल मूल अधिकार के रूप में जोड़ा गया है, बल्कि इसे अनुच्छेद 51ए के तहत माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य भी बनाया गया है कि वे अपने 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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पारिस्थितिकीय पिरामिड (Ecological Pyramids) और उनके प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) सदैव सीधा होता है, क्योंकि ऊर्जा का प्रवाह एकमार्गीय होता है और लिंडेनमैन के 10 प्रतिशत नियम (10% Law) के अनुसार प्रत्येक उच्च पोषण स्तर पर जाने पर ऊर्जा का ह्रास होता है।
2. जलीय पारितंत्र (Aquatic Ecosystem) में संख्या का पिरामिड (Pyramid of Numbers) सदैव उल्टा होता है, क्योंकि प्राथमिक उत्पादक (फाइटोप्लांकटन) की संख्या शाकाहारी जंतुओं (जूप्लांकटन) और मछलियों की तुलना में कम होती है।
3. वृक्ष पारितंत्र (Tree Ecosystem) में जैवभार का पिरामिड (Pyramid of Biomass) उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि एक विशाल वृक्ष (उत्पादक) का जैवभार उस पर निर्भर रहने वाले शाकाहारी जीवों (पक्षियों और कीटों) की कुल मात्रा से बहुत अधिक होता है।
4. बायोम या वन पारितंत्र में ऊर्जा और जैवभार दोनों के पिरामिड सामान्यतः सीधे होते हैं, किंतु समुद्र में बायोमास का पिरामिड उल्टा पाया जा सकता है क्योंकि वहाँ फाइटोप्लांकटन का अल्पकालिक जैवभार जलीय जीवों के जैवभार से कम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण तथा पारिस्थितिकी (Ecology) के अंतर्गत 'पारिस्थितिक पिरामिड' (Ecological Pyramids) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊर्जा का पिरामिड (Pyramid of Energy) सदैव सीधा (Upright) बनता है, क्योंकि पारिस्थितिक तंत्र में लिंडमैन (Lindeman) के 'दस प्रतिशत नियम' (10% Law) के अनुसार ऊर्जा का प्रवाह एकपोषी स्तर से उच्च पोषी स्तर की ओर जाने पर हमेशा घटता जाता है तथा ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है।
2. जलीय पारिस्थितिक तंत्र (Aquatic Ecosystem) में 'बायोमास का पिरामिड' (Pyramid of Biomass) सामान्यतः उल्टा (Inverted) बनता है, क्योंकि यहाँ प्राथमिक उत्पादकों (फाइटोप्लांकटन) का कुल बायोमास उच्च पोषी स्तरों (जैसे ज़ूप्लांकटन और छोटी मछलियों) के बायोमास की तुलना में कम होता है।
3. 'संख्या का पिरामिड' (Pyramid of Number) किसी वृक्षीय पारिस्थितिक तंत्र (Tree Ecosystem) में उल्टा बनता है, क्योंकि एक बड़े आकार के एकल वृक्ष (उत्पादक) पर आश्रित शाकाहारी पक्षियों की संख्या अधिक होती है और उन पर परजीवी के रूप में रहने वाले जीवों की संख्या और भी अधिक हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/से हैं?
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अंतर्गत 'पारिस्थितिकीय पिरैमिड' (Ecological Pyramids) और उनके विभिन्न प्रकारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चार्ल्स एल्टन (Charles Elton) द्वारा प्रतिपादित पारिस्थितिकीय पिरैमिडों में 'संख्या का पिरैमिड' (Pyramid of Numbers) घास के मैदान के पारिस्थितिकी तंत्र में हमेशा सीधा होता है, क्योंकि इसमें उत्पादकों (घास) की संख्या सबसे अधिक होती है और उच्च पोषण स्तर की ओर बढ़ने पर जीवों की संख्या घटती जाती है।
2. एक बड़े वृक्ष के पारिस्थितिकी तंत्र (Tree Ecosystem) में 'संख्या का पिरैमिड' उलटा (Inverted) बनता है, क्योंकि यहाँ एक ही बड़े वृक्ष (उत्पादक) पर आश्रित शाकाहारी पक्षियों की संख्या अधिक होती है और उन पर पलने वाले परजीवियों की संख्या उससे भी अधिक होती है।
3. जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (Aquatic Ecosystem) में 'बायोमास का पिरैमिड' (Pyramid of Biomass) हमेशा सीधा बनता है, क्योंकि फाइटोप्लांकटन (पादपप्लवक) का कुल जीवभार (Biomass) जलीय जीवों (जैसे मछलियों) की तुलना में बहुत अधिक होता है और यह जलीय खाद्य श्रृंखला का आधार बनता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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भारत के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार ........ आयु वर्ग के अंतर्गत आता है-
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पर्यावरण अध्ययन (EVS) के शिक्षण अधिगम और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के संदर्भ में 'पारिस्थितिक पिरामिड' (Ecological Pyramids) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'संख्या का पिरामिड' (Pyramid of Numbers) सदैव सीधा (Upright) ही होता है, चाहे वह घास का मैदान पारिस्थितिकी तंत्र हो, वन पारिस्थितिकी तंत्र हो या फिर एक बड़े आकार के वृक्ष का पारिस्थितिकी तंत्र हो।
2. 'जीवभार का पिरामिड' (Pyramid of Biomass) अधिकांश स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्रों में सीधा बनता है, क्योंकि इसमें उत्पादकों का कुल जीवभार उपभोक्ताओं की तुलना में बहुत अधिक होता है, किंतु जलीय पारिस्थितिकी तंत्र (जैसे तालाब या समुद्र) में यह उल्टा (Inverted) बनता है क्योंकि वहाँ पादपप्लवक (Phytoplankton) का जीवभार उच्च मांसाहारी जंतुओं की तुलना में कम होता है।
3. 'ऊर्जा का पिरामिड' (Pyramid of Energy) किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र में हमेशा सीधा बनता है, क्योंकि ऊष्मप्रवैगिकी के नियमों (Laws of Thermodynamics) के अनुसार एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर ऊर्जा के स्थानांतरण के दौरान लगातार ह्रास होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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