नैतिक एवं चारित्रिक विकास
Asked 2 महीने पहले · Viewed 1,253 times
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अंतर्गत 'पूर्व-रूढ़िगत नैतिकता' (Pre-Conventional Morality) के दोनों चरणों—अर्थात 'आज्ञाकारिता एवं दंड अभिविन्यास' (Obedience and Punishment Orientation) तथा 'व्यक्तिगत हित एवं विनिमय अभिविन्यास' (Self-Interest and Exchange Orientation)—की तात्विक गतिकी का गहन विश्लेषण करने पर, यदि एक 7 वर्ष का बालक इस बात से प्रेरित होकर कार्य करता है कि 'यदि मैं आज्ञा का पालन करूँगा तो मुझे सजा नहीं मिलेगी' तथा 'यदि मैं अपना खिलौना अपने भाई के साथ साझा करूँगा तो वह भी भविष्य में मुझे अपना खिलौना देगा', तो कोहलबर्ग के इस नैतिक ढांचे के अनुसार बालक का यह व्यवहार किस प्रकार के मनोवैज्ञानिक और संज्ञानात्मक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, 'पूर्व-रूढ़िगत नैतिकता' (Pre-Conventional Morality) प्रारंभिक बाल्यावस्था में पाई जाती है, जहाँ व्यक्ति बाहरी और भौतिक परिणामों के संदर्भ में नियमों की व्याख्या करता है। इसमें पहला चरण 'आज्ञाकारिता एवं दंड अभिविन्यास' (दंड से बचने की प्रवृत्ति) और दूसरा चरण 'व्यक्तिगत हित एवं विनिमय अभिविन्यास' (पारस्परिकता या 'जैसे को तैसा' का सिद्धांत) होता है। विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
अगला प्रश्न →
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के…
← पिछला प्रश्न
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of…
Related Questions
→
बच्चों के नैतिक विकास (Moral Development) के सिद्धांत और लॉरेंस कोहलबर्ग के चरणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के 'उत्तर-रूढ़िगत स्तर' (Post-conventional Level) के अंतर्गत आने वाले सामाजिक अनुबंध और व्यक्तिगत अधिकार अभिविन्यास में व्यक्ति यह मानता है कि नियम सामाजिक कल्याण के लिए लचीले समझौते हैं और यदि कोई कानून मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है, तो उसे बदला जाना चाहिए।
2. 'रूढ़िगत स्तर' (Conventional Level) के 'अच्छा लड़का-अच्छी लड़की अभिविन्यास' (Good Boy-Good Girl Orientation) में बच्चा दूसरों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और समाज द्वारा स्वीकृत 'अच्छा' कहलाने की इच्छा से प्रेरित होकर नैतिक निर्णय लेता है।
3. कोहलबर्ग के अनुसार नैतिक विकास का 'पूर्व-रूढ़िगत स्तर' (Pre-conventional Level) लगभग 10 से 13 वर्ष की उम्र के बाद शुरू होता है, जहाँ बालक सामाजिक व्यवस्था के प्रति पूर्ण निष्ठा रखते हुए देश के कानूनों और नियमों का पालन करना अपना सर्वोच्च नैतिक कर्तव्य मानता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
बच्चों के सामाजिक विकास (Social Development) और समाजीकरण की प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समाजीकरण की प्रक्रिया में 'प्राथमिक समाजीकरण' (Primary Socialization) का मुख्य अभिकर्ता (Agent) परिवार को माना जाता है, जहाँ बच्चा शैशवावस्था और प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान भाषा, संस्कृति और बुनियादी मूल्यों को सीखता है।
2. 'द्वितीयक समाजीकरण' (Secondary Socialization) के अंतर्गत विद्यालय, सहकर्मी समूह (Peer Group), मीडिया और पड़ोस आते हैं, जो बच्चे के बड़े होने पर उसके दृष्टिकोण, सामाजिक भूमिकाओं और औपचारिक नियमों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत के अनुसार, उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-Conventional Level) पर समाजीकरण और नैतिकता का आधार पूरी तरह से सामाजिक मानदंडों और कानूनों का बिना किसी आलोचना के आँख बंद कर पालन करना होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत की आलोचना करते हुए मनोवैज्ञानिक कैरल गिलिगन (Carol Gilligan) ने यह तर्क दिया कि कोहलबर्ग का प्रतिमान पुरुषों के न्याय-उन्मुख (Justice-oriented) दृष्टिकोण पर अत्यधिक केंद्रित है, जबकि महिलाओं का नैतिक विकास 'देखभाल और जिम्मेदारी' (Care and Responsibility) के संदर्भात्मक और संबंधात्मक दृष्टिकोण पर आधारित होता है। गिलिगन के इस नारीवादी और विकासात्मक परिप्रेक्ष्य के अनुसार, महिलाओं के नैतिक तर्क का सर्वोच्च और परिपक्वतम स्तर कोहलबर्ग के किस स्तर या वैचारिक प्रतिमान से सीधे तौर पर भिन्नता रखता है?
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Moral Development Theory) के अंतर्गत 'उत्तर-पारंपरिक स्तर' (Post-Conventional Level) के द्वितीय चरण—'विवेक और सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांत अभिविन्यास' (Universal Ethical Principles Orientation)—की दार्शनिक और तात्विक गहराई का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर, इस चरण में व्यक्ति के नैतिक निर्णय और न्याय की अवधारणा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक है?
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के विभिन्न स्तरों और चरणों की गत्यात्मक संरचना का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई परिपक्व व्यक्ति समाज द्वारा निर्धारित पारंपरिक नियमों या कानूनों से परे जाकर अपने स्वयं के आंतरिक विवेक, मानवाधिकारों और न्याय के सार्वभौमिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) के आधार पर नैतिक निर्णय लेता है—भले ही वे नियम किसी विशिष्ट सामाजिक संदर्भ में कानून के विरुद्ध क्यों न हों—तो कोहलबर्ग के इस नैतिक ढांचे के अनुसार व्यक्ति का यह आचरण किस उच्चतम स्तर और चरण को प्रदर्शित करता है?
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) की आलोचनाओं और उसके उत्तर-रूढ़िगत स्तर (Post-conventional Morality) की तात्विक संरचना का गहन विश्लेषण करने पर, यदि कोई व्यक्ति सामाजिक अनुबंध (Social Contract) की सीमाओं से परे जाकर अपने व्यक्तिगत अंतःकरण के सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों (Universal Ethical Principles) के आधार पर निर्णय लेता है, और वह यह मानता है कि न्याय, मानवाधिकार और मानवीय गरिमा किसी भी लिखित कानून या सामाजिक समझौते से सर्वोपरि हैं, तो कोहलबर्ग के इस मॉडल के अनुसार व्यक्ति का यह आचरण नैतिक विकास के किस विशिष्ट चरण (Stage) को निरूपित करता है?
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के विभिन्न स्तरों और चरणों का गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करने पर, यदि एक किशोरावस्था का बालक सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखने, नियमों का सख्ती से पालन करने और समाज द्वारा 'अच्छा नागरिक' या 'कानून-मानने वाला व्यक्ति' के रूप में स्वीकृत होने की प्रबल इच्छा से प्रेरित होकर नैतिक निर्णय लेता है, तो कोहलबर्ग के इस ढांचे के अनुसार यह स्थिति किस विशिष्ट स्तर और चरण को दर्शाती है?
→
लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत (Theory of Moral Development) के अंतर्गत 'उत्तर-रूढ़िगत नैतिकता' (Post-Conventional Morality) के दूसरे चरण—अर्थात 'सार्वभौमिक नैतिक अंतःकरण अभिमुखता' (Universal Ethical Principle Orientation, स्टेज 6)—की तात्विक, दार्शनिक और मनोवैज्ञानिक गतिकी का गहन विश्लेषण करने पर, इस अवस्था की विशिष्ट विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सर्वाधिक प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक रूप से सत्य है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.