समायोजन एवं रक्षा-युक्तियाँ
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सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) के 'मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत' (Psychoanalytical Theory) के अंतर्गत प्रतिपादित 'रक्षा तंत्र या रक्षा युक्तियाँ' (Defense Mechanisms) में से एक प्रमुख युक्ति 'प्रतिगमन' (Regression) की अवधारणा—जिसके तहत अत्यधिक तनाव, चिंता, निराशा या आघात की स्थिति में व्यक्ति (विशेषकर बच्चे) अपने वर्तमान विकासात्मक स्तर से पीछे हटकर किसी पूर्ववर्ती या बचपन के अधिक सुरक्षित, निर्भर और अपरिपक्व विकासात्मक चरण के व्यवहारों (जैसे अंगूठा चूसना, तुलाना, अत्यधिक रोना या जिद करना) का पुनः प्रदर्शन करने लगता है—के वास्तविक मनोवैज्ञानिक निहितार्थ एवं कक्षा-कक्षीय शिक्षण में विद्यार्थियों के संवेगात्मक समायोजन, तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के वैज्ञानिक संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा मनोवैज्ञानिक कथन सबसे अधिक प्रामाणिक और वैज्ञानिक रूप से मान्य है?
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Detailed Explanation
सिगमंड फ्रायड के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत के अनुसार, 'प्रतिगमन' (Regression) अहंकार (Ego) की एक अचेतन रक्षा तंत्र (Defense Mechanism) है। जब कोई व्यक्ति (बालक या वयस्क) अत्यधिक तनाव, भय, असुरक्षा या निराशा का सामना करता है, तो उसका अहंकार उस दर्दनाक वास्तविकता से निपटने के लिए विकास के शुरुआती और सुरक्षित चरणों के व्यवहारों पर लौट आता है। कक्षा-कक्षीय संदर्भ में, यदि कोई बच्चा अचानक घर की किसी समस्या या स्कूल के भारी तनाव के कारण अपरिपक्व व्यवहार (जैसे अत्यधिक रोना, जिद करना या आश्रित होना) प्रदर्शित करता है, तो यह उसका प्रतिगमन है। यह अचेतन रूप से तात्कालिक संवेगात्मक राहत तो देता है, परंतु यदि शिक्षक इसे समय रहते समझकर सहानुभूतिपूर्ण और सकारात्मक मार्गदर्शन प्रदान न करें, तो यह विद्यार्थी के स्वस्थ मनोवैज्ञानिक विकास और सामाजिक समायोजन में गंभीर बाधा बन जाता है।
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