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विकास के क्षेत्र सभी देखें (969) शारीरिक एवं गामक विकास3 संज्ञानात्मक विकास429 सामाजिक विकास21 संवेगात्मक विकास109 भाषा विकास23 नैतिक एवं चारित्रिक विकास384
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अधिगम (सीखना) सभी देखें (1410) अधिगम: अर्थ, प्रकृति एवं प्रकार21 शास्त्रीय अनुबंधन (पावलोव)90 क्रियाप्रसूत अनुबंधन (स्किनर)262 थॉर्नडाइक: प्रयास एवं त्रुटि191 गेस्टाल्ट एवं अंतर्दृष्टि अधिगम284 रचनावाद एवं अन्य अधिगम सिद्धांत44 अधिगम स्थानांतरण, वक्र एवं पठार266 स्मृति एवं विस्मृति123 ध्यान एवं रुचि5 अभिप्रेरणा एवं प्रेरक97 अधिगम शैलियाँ एवं रणनीतियाँ27
बुद्धि, व्यक्तित्व एवं सृजनशीलता सभी देखें (925) बुद्धि: अवधारणा एवं सिद्धांत212 गार्डनर: बहुबुद्धि301 संवेगात्मक बुद्धि (EQ)11 बुद्धि परीक्षण (IQ)65 व्यक्तित्व: सिद्धांत एवं प्रकार219 व्यक्तित्व मापन एवं परीक्षण24 सृजनशीलता (Creativity)92 अभिक्षमता, अभिवृत्ति एवं अभिरुचि1
वैयक्तिक भिन्नता एवं समावेशी शिक्षा सभी देखें (712) वैयक्तिक भिन्नताएँ30 समावेशी शिक्षा250 विशेष आवश्यकता वाले बालक (CWSN)63 अधिगम अक्षमता (डिस्लेक्सिया आदि)315 ADHD, ऑटिज़्म एवं न्यूरो-विकासात्मक स्थितियाँ22 प्रतिभाशाली एवं सृजनशील बालक9 वंचित, पिछड़े एवं लैंगिक समानता23
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बाल-केंद्रित एवं सक्रिय शिक्षण
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बाल केंद्रित शिक्षा (Child-Centric Education) की अवधारणा के अंतर्गत, निम्नलिखित में से कौन सी विशेषता 'प्रगतिशील शिक्षा' (Progressive Education) के दार्शनिक जॉन ड्यूई (John Dewey) के विचारों के सबसे अधिक अनुकूल है?

Detailed Explanation

📌 मुख्य संकल्पना / सिद्धांत:

बाल केंद्रित शिक्षा और प्रगतिशील शिक्षा (Progressive Education) के प्रख्यात दार्शनिक जॉन ड्यूई (John Dewey) के अनुसार, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है जो कि केवल निष्क्रिय रूप से सुनने या रटने से संभव नहीं है। जॉन ड्यूई ने 'करके सीखने' (Learning by Doing) के सिद्धांत पर सबसे अधिक बल दिया। उनके अनुसार विद्यालय कोई कृत्रिम वातावरण नहीं बल्कि समाज का लघु रूप (Miniature Society) होना चाहिए जहाँ बालक वास्तविक जीवन की समस्याओं का सामना करते हुए अन्वेषण, प्रयोग और सहयोगात्मक अधिगम के माध्यम से ज्ञान का निर्माण स्वयं करता है। इसलिए, विकल्प (b) इस दार्शनिक दृष्टिकोण का सबसे सटीक प्रतिनिधित्व करता है क्योंकि यह व्यावहारिक अनुभव और समस्या समाधान को प्राथमिकता देता है।

📊 परीक्षा उपयोगी मुख्य बिंदु:

  • जॉन ड्यूई प्रगतिशील शिक्षा आंदोलन (Progressive Education Movement) के जनक माने जाते हैं, जिन्होंने प्रयोगशाला विद्यालयों (Laboratory Schools) की शुरुआत की थी।
  • 'कर करके सीखना' (Learning by Doing) और 'चिंतनशील चिंतन' (Reflective Thinking) ड्यूई के शैक्षणिक दर्शन के मुख्य स्तंभ हैं।
  • विकल्प (a) और (c) पारंपरिक शिक्षा प्रणाली (Teacher-Centric Education) को दर्शाते हैं जिसमें शिक्षक सर्वसर्वा होता है और कठोर पाठ्यक्रम होता है, जो प्रगतिशील शिक्षा के विरुद्ध है।
  • विकल्प (d) रटन विद्या (Rote Learning) को बढ़ावा देता है जो बाल-केंद्रित शिक्षा शास्त्र (Pedagogy) और NCF-2005 के सिद्धांतों का पूरी तरह उल्लंघन करता है।

📖 सैद्धांतिक संदर्भ: आधुनिक बाल-विकास मनोविज्ञान में प्रगतिशील शिक्षा और जॉन ड्यूई के विचार बच्चों की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य मानते हैं। अधिक जानकारी के लिए प्रगतिशील शिक्षा और जॉन ड्यूई के सिद्धांतों का अध्ययन करें।

🎯 परीक्षा दृष्टिकोण: CTET / UPTET / BPSC TRE हेतु महत्वपूर्ण विस्तृत हल ➔
गहन विश्लेषण एवं परीक्षा उपयोगी रणनीतियाँ:

शिक्षक पात्रता परीक्षाओं (जैसे CTET, UPTET, KVS, DSSSB) में जॉन ड्यूई और प्रगतिशील शिक्षा से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। प्रश्न पत्र हल करते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि कौन सा विकल्प विद्यार्थी को सक्रिय अधिगमकर्ता (Active Learner) के रूप में स्थापित करता है। जॉन ड्यूई के अनुसार शिक्षा भविष्य की तैयारी नहीं बल्कि जीवन का एक हिस्सा है (Education is not a preparation for life, life itself is education)। इस प्रकार के वैचारिक प्रश्न शिक्षकों से यह अपेक्षा करते हैं कि वे कक्षा कक्ष में रटने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करें और अनुभवात्मक अधिगम (Experiential Learning) को बढ़ावा दें।

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