सकारात्मक बनाम नकारात्मक पुनर्बलन: अंतर और तुलना
सकारात्मक पुनर्बलन में व्यवहार के बाद कोई सुखद चीज़ जोड़ी जाती है, जबकि नकारात्मक पुनर्बलन में कोई अप्रिय चीज़ हटाई जाती है। दोनों का असर एक ही होता है: व्यवहार के दोहराए जाने की संभावना बढ़ती है।
सकारात्मक पुनर्बलन और नकारात्मक पुनर्बलन में मुख्य अंतर
| आधार | सकारात्मक पुनर्बलन | नकारात्मक पुनर्बलन |
|---|---|---|
| क्रिया | सुखद उद्दीपक जोड़ना। | अप्रिय उद्दीपक हटाना। |
| व्यवहार पर असर | व्यवहार बढ़ता है। | व्यवहार बढ़ता है। |
| उद्दीपक का प्रकार | सुखद, जैसे प्रशंसा, इनाम, तारा। | अप्रिय, जैसे शोर, डाँट, असुविधा। |
| उदाहरण | होमवर्क जमा करने पर प्रशंसा मिलने से बच्चा रोज़ जमा करता है। | सीट बेल्ट लगाते ही बीप बंद होती है, इसलिए चालक बेल्ट लगाता है। |
| दंड से संबंध | दंड से अलग है, क्योंकि दंड व्यवहार घटाता है। | दंड नहीं है, यही सबसे आम भ्रम है। |
| कक्षा में उपयोग | शाबाशी, पुरस्कार और विशेषाधिकार। | सही करने पर अतिरिक्त गृहकार्य माफ़ करना। |
| संबंधित अधिगम | वांछित व्यवहार को सीधे सीखना। | पलायन और परिहार अधिगम से जुड़ा। |
दंड से अंतर
पुनर्बलन का पैमाना हमेशा यही है कि व्यवहार बढ़ा या नहीं। जोड़ना या हटाना केवल यह बताता है कि पुनर्बलन सकारात्मक है या नकारात्मक। दंड में व्यवहार घटता है, चाहे उद्दीपक जोड़ा जाए या हटाया जाए।
परीक्षा के लिए याद रखें
व्यवहार बढ़े तो पुनर्बलन, घटे तो दंड। सुखद चीज़ जुड़े तो सकारात्मक, अप्रिय चीज़ हटे तो नकारात्मक। स्किनर की क्रियाप्रसूत अनुबंधन में दोनों आते हैं।
अभ्यास प्रश्न
- सकारात्मक पुनर्बलन पर MCQ
- नकारात्मक पुनर्बलन पर MCQ
- अवधारणा: सकारात्मक पुनर्बलन
- अवधारणा: नकारात्मक पुनर्बलन
- अवधारणा: व्यवहार को आकार देना
संदर्भ
- बी.एफ. स्किनर, Science and Human Behavior (1953)
- NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें