संरक्षण (Conservation) क्या है?
संरक्षण का अर्थ है यह समझ कि किसी वस्तु का आकार, रूप या स्थान बदलने पर भी उसकी मात्रा, संख्या या वज़न वही रहता है। पियाजे के अनुसार यह क्षमता मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 7 से 11 वर्ष) में विकसित होती है।
संरक्षण: विस्तृत व्याख्या
क्लासिक प्रयोग
पियाजे ने बच्चों के सामने समान मात्रा का पानी दो एक जैसे गिलासों में रखा, फिर एक गिलास का पानी लंबे, पतले गिलास में डाल दिया। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग 2 से 7 वर्ष) के बच्चे कहते हैं कि लंबे गिलास में पानी ज़्यादा है, क्योंकि वे केवल दिखावट पर ध्यान देते हैं।
संरक्षण से जुड़ी बातें
- संरक्षण की समझ के लिए विकेंद्रण (एक से अधिक पक्षों को देखना) और उत्क्रमणीयता (क्रिया को उलटकर सोचना) ज़रूरी है।
- संख्या, द्रव्यमान और आयतन के संरक्षण अलग-अलग उम्र में आते हैं।
उदाहरण
मिट्टी की गोल गेंद को चपटा करने पर मूर्त संक्रियात्मक अवस्था का बच्चा कहता है कि मिट्टी उतनी ही है, बस आकार बदला है।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
प्रश्न में "मात्रा नहीं बदलती चाहे रूप बदल जाए" आए तो संरक्षण; साथ में अवस्था पूछी जाए तो मूर्त संक्रियात्मक। पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की पहचान संरक्षण का अभाव है।
संरक्षण पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)
- विकासात्मक/संज्ञानात्मक सिद्धांत के प्रतिपादक कौन हैं?
- जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'संरक्षण'…
- जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत…
- जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत…
- जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage)…
- पियाजे के अनुसार, 'केन्द्रीकरण' (Centration) की प्रवृत्ति किस अवस्था की मुख्य सीमा है?
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संबंधित अवधारणाएँ
- जीन पियाजे, The Child's Conception of Number
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