आत्मकेंद्रितता (Egocentrism) क्या है?
आत्मकेंद्रितता का अर्थ दूसरे के नज़रिये से चीज़ों को न देख पाना है। पियाजे के अनुसार पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (लगभग दो से सात वर्ष) का बच्चा मान लेता है कि जो वह देखता या सोचता है, वही सब देखते और सोचते हैं।
आत्मकेंद्रितता: विस्तृत व्याख्या
आत्मकेंद्रितता को समझें
यह स्वार्थीपन नहीं, सोच की सीमा है। पियाजे और इनहेल्डर के तीन पर्वतों वाले प्रयोग में बच्चे को मॉडल दिखाकर पूछा गया कि दूसरी ओर बैठी गुड़िया को क्या दिखेगा। छोटे बच्चे अपना ही दृश्य बताते थे। उम्र बढ़ने और सामाजिक अनुभव से यह सीमा कम होती है।
याद रखने योग्य बिंदु
- पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की मुख्य विशेषता
- तीन पर्वत प्रयोग इसी का परीक्षण है
- मूर्त संक्रियात्मक अवस्था में विकेंद्रण से यह घटता है
उदाहरण
चार साल का बच्चा फ़ोन पर दादी को बताता है, देखो यह मेरा खिलौना, और हाथ में खिलौना उठाकर दिखाता है। उसे ध्यान नहीं कि दादी उसे देख नहीं सकतीं।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
तीन पर्वत प्रयोग, दूसरे का दृष्टिकोण न समझ पाना या अपने जैसा ही सब पर थोप देना जैसे संकेत आत्मकेंद्रितता की ओर इशारा करते हैं। इसे अवस्था सहित याद करें: पूर्व-संक्रियात्मक।
आत्मकेंद्रितता पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)
- विकासात्मक/संज्ञानात्मक सिद्धांत के प्रतिपादक कौन हैं?
- जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'संरक्षण'…
- जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत…
- जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत…
- जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage)…
- पियाजे के अनुसार, 'केन्द्रीकरण' (Centration) की प्रवृत्ति किस अवस्था की मुख्य सीमा है?
तुलना पढ़ें
संबंधित अवधारणाएँ
- जीन पियाजे और बार्बेल इनहेल्डर, The Child's Conception of Space (फ्रेंच 1948, अंग्रेज़ी 1956)
- NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें