उत्क्रमणीयता (Reversibility) क्या है?
उत्क्रमणीयता किसी क्रिया या प्रक्रिया को मन में उलटकर सोच पाने की क्षमता है। पियाजे के अनुसार यह मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (लगभग सात से ग्यारह वर्ष) में विकसित होती है और संरक्षण की समझ का आधार बनती है।
उत्क्रमणीयता: विस्तृत व्याख्या
उत्क्रमणीयता को समझें
जो बच्चा जान लेता है कि चपटी की गई मिट्टी को दोबारा गोल बनाया जा सकता है, वह समझ जाता है कि मात्रा नहीं बदली। गणित में भी जोड़ और घटाव, गुणा और भाग एक-दूसरे के उलट हैं। इसी समझ से बच्चा परिणाम से पीछे लौटकर कारण तक पहुँच पाता है।
याद रखने योग्य बिंदु
- उत्क्रमणीयता के साथ विकेंद्रण मिलकर संरक्षण संभव बनाते हैं
- मूर्त संक्रियात्मक अवस्था की प्रमुख मानसिक क्रिया
- पूर्व-संक्रियात्मक बच्चे में इसका अभाव होता है
उदाहरण
आठ साल का बच्चा जानता है कि 7 + 5 = 12 है, तो 12 - 5 = 7 होगा। तीन साल का बच्चा यह रिश्ता नहीं पकड़ पाता।
परीक्षा में कैसे पूछा जाता है
क्रिया को मन में उलटना यानी उत्क्रमणीयता, और इसका स्थान मूर्त संक्रियात्मक अवस्था। संरक्षण वाले प्रश्नों में उत्क्रमणीयता और विकेंद्रण दोनों कारण के रूप में आते हैं।
उत्क्रमणीयता पर अभ्यास प्रश्न (MCQ)
- विकासात्मक/संज्ञानात्मक सिद्धांत के प्रतिपादक कौन हैं?
- जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के संदर्भ में, 'विकेंद्रीकरण' (Decentration) और 'संरक्षण'…
- जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत…
- जीन पियाजे (Jean Piaget) के 'संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत' (Theory of Cognitive Development) के अंतर्गत…
- जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत के अंतर्गत, 'पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था' (Preoperational Stage)…
- पियाजे के अनुसार, 'केन्द्रीकरण' (Centration) की प्रवृत्ति किस अवस्था की मुख्य सीमा है?
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संबंधित अवधारणाएँ
संदर्भ
- जीन पियाजे और बार्बेल इनहेल्डर, The Psychology of the Child (अंग्रेज़ी अनुवाद 1969)
- NCERT, मनोविज्ञान की पाठ्यपुस्तकें