पियाजे बनाम वाइगोत्स्की: अंतर और तुलना
पियाजे मानते हैं कि बालक स्वयं खोज और अनुभव से अवस्थाओं में आगे बढ़ते हुए ज्ञान का निर्माण करता है, जबकि वाइगोत्स्की के अनुसार ज्ञान का निर्माण समाज, भाषा और दूसरों के साथ अंतःक्रिया से होता है। दोनों रचनावादी हैं, पर बल अलग-अलग है।
पियाजे और वाइगोत्स्की में मुख्य अंतर
| आधार | पियाजे | वाइगोत्स्की |
|---|---|---|
| ज्ञान का निर्माण | बालक स्वयं खोज और क्रिया से व्यक्तिगत रूप में ज्ञान बनाता है। | ज्ञान सामाजिक अंतःक्रिया और संस्कृति से सह-निर्मित होता है। |
| विकास का स्वरूप | चार निश्चित अवस्थाओं में क्रमिक विकास। | सतत प्रक्रिया; निश्चित अवस्थाएँ नहीं बताईं। |
| सामाजिक परिवेश की भूमिका | अपेक्षाकृत सीमित; बालक स्वयं केंद्र में है। | केंद्रीय; वयस्क और सहपाठी सीखने को आगे बढ़ाते हैं। |
| भाषा की भूमिका | विचार पहले आते हैं, भाषा उन्हें व्यक्त करती है। | भाषा विचार का मुख्य साधन है; निजी भाषा आत्म-नियमन में सहायक है। |
| सीखना और विकास | विकास पहले होता है, सीखना उसके अनुसार चलता है। | सही सहायता से सीखना विकास को आगे ले जाता है। |
| प्रमुख संकल्पनाएँ | स्कीमा, आत्मसातीकरण, समायोजन, संतुलनीकरण। | ZPD, स्कैफोल्डिंग, निजी भाषा। |
| शिक्षक की भूमिका | सुविधादाता; खोज के अवसर और उपयुक्त अनुभव देना। | मार्गदर्शक; ZPD में स्कैफोल्डिंग और सहयोगात्मक अधिगम देना। |
परीक्षा के लिए याद रखें
पियाजे = व्यक्तिगत खोज + चार अवस्थाएँ + स्कीमा। वाइगोत्स्की = सामाजिक अंतःक्रिया + ZPD + स्कैफोल्डिंग। "सहायता से सीखना" दिखे तो वाइगोत्स्की, "स्वयं खोज और अवस्था" दिखे तो पियाजे।
अभ्यास प्रश्न
- पियाजे पर MCQ
- वाइगोत्स्की पर MCQ
- अवधारणा: आत्मसातीकरण
- अवधारणा: समायोजन
- अवधारणा: संरक्षण
- अवधारणा: स्कीमा
संदर्भ
- जीन पियाजे, The Origins of Intelligence in Children
- लेव वाइगोत्स्की, Mind in Society
- NCERT, मनोविज्ञान एवं शिक्षा संबंधी पाठ्यपुस्तकें